बदायूं पालिका पर भाजपा को कब्जा करने हेतु देना होगा मजबूत प्रत्याशी

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पूरे दमखम से एकजुट होकर लड़ाना होगा पार्टी प्रत्याशी को
कार्यकर्ताओं की राय से चुना जाये प्रत्याशी
बदायूं। भारतीय जनता पार्टी स्वयं को बहुत ही अनुशासित और कार्यकर्ताओं की भावना का ख्याल रखने वाली पार्टी बताती है। वर्तमान में प्रदेश और केन्द्र में भाजपा की सरकार कार्यरत है और इसी के दौरान प्रदेश में निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। विधानसभा चुनावों में रिकार्ड जीत हासिल करने वाली पार्टी के लिए यह चुनाव अग्निपरीक्षा भी हैं क्योंकि जिस जनता ने प्रदेश की सत्ता भाजपा को सिर पर बिठाकर सौंपी थी, क्या निकाय चुनावों में वही प्रदर्शन भाजपा फिर से दोहरा पायेगी, यह यक्ष प्रश्न सभी के सामने है!
बदायूं नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष पद महिला आरक्षित हो गयी है और इस पद के लिए जो महिलायें पहले से अपनी उम्मीदवारी की दावेदारी कर रहीं थीं उनमें दीपमाला गोयल जो पिछली बार भी भाजपा प्रत्याशी थीं, श्रीमती रजनी मिश्रा जो कि एक समाजसेविका हैं और भाजपा से काफी समय से जुड़ी हुईं हैं, इसके अलावा पूनम गुप्ता भी दावेदार हैं जो भाजपा में काफी दिनों से सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। महिला सीट होने के कारण कई भाजपा के दिग्गज नेता भी अपनी पत्नी के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं जिसमें अशोक भारतीय, स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता, राजेश्वर सिंह पटेल, अजीत वैश्य प्रमुख रूप से अपनी पत्नी के लिए दावेदारी कर रहे हैं।
सबसे पहले बात करते हैं सक्रिय महिला नेत्रियों की जिसमें दीपमाला गोयल सबसे पुरानी नेत्री हैं, श्रीमती गोयल गत कई दशकों से भाजपा से जुड़ी हुई हैं और पार्टी में कई पदों पर दायित्व निर्वहन करने के साथ-साथ दो बार नगर पालिका परिषद बदायूं के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन दुर्भाग्यवश वह कभी चुनाव जीत नहीं सकी हैं। इस बार पार्टी ने निकाय चुनावों में अपनी जीत का परचम लहराने के लिए एक नया मंत्र निकाला है जिस कारण उनकी दावेदारी में जो दम होनी चाहिए थी वह नहीं बन पा रही है। सूत्रों की मानें तो वर्तमान परिपेक्ष्य में श्रीमती दीपमाला गोयल की दावेदारी सबसे कमजोर हो चुकी है और टिकट की दौड़ में काफी पिछड़ गयी हैं, लेकिन अब भी उन्होंने अपने प्रयास छोड़े नहीं हैं।

अब बात करते हैं श्रीमती रजनी मिश्रा की दावेदारी की। श्रीमती मिश्रा शहर में काफी दिनों से एक ब्यूटी पार्लर का संचालन कर रही हैं और उसके माध्यम से वह लगातार समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं। वह अपने पार्लर में गरीब बालिकाओं को मुफत पार्लर कोर्स की शिक्षा देती हैं और उन्हें स्वाबलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। इसके अलावा वह स्वच्छता अभियान से भी जुड़ी हुई हैं और नगर को स्वच्छ बनाने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं तथा सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान हेतु किये जा रहे प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाने में लगी हुई हैं। उनकी छवि नगर में एक स्वच्छ, निर्भीक, कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार महिला के रूप में बनी हुई है। श्रीमती मिश्रा की बदायूं नगर पालिका अध्यक्ष की दावेदारी पार्टी के अन्दर काफी मजबूत रूप से देखी जा रही है क्योंकि नगर में उनके द्वारा समाजसेवा में किये गये कार्यों की लगातार जनता द्वारा सराहना की जा रही है। उनकी छवि एक निर्भीक महिला के रूप में लगातार निखर रही है जिससे जनता खासकर महिलाओं को यह भरोसा हो रहा है कि यदि श्रीमती मिश्रा बदायूं पालिका की अध्यक्ष बन जाती हैं तो महिलाओं की स्थिति में खासा सुधार होने के आसार हैं। वर्तमान में श्रीमती रजनी मिश्रा की दावेदारी काफी मजबूत दिख रही है और उनके टिकट मिलने से भाजपा को एक ऐसी नेत्री मिल जायेगी जिसकी छवि ईमानदारी के साथ-साथ निर्भीक महिला की भी है।
इसके अलावा महिलाओं में प्रमुख रूप से एक और उम्मीदवार हैं जिनका नाम श्रीमती पूनम गुप्ता। विधानसभा चुनावों से नगर की जनता के बीच जाकर इन्होंने अपनी पहचान बनाना शुरू की और सोशल साइट्स पर राष्ट्रवादी पूर्णिमा पूनम गुप्ता के नाम से इनके चर्चे बड़े जोर शोर से शुरू हुए। श्रीमती गुप्ता भी अपनी छवि बनाने के प्रयासरत हैं और नगर जनता के बीच अपना पक्ष लगातार रख रही हैं।
इसके अलावा अगर किसी दावेदारी को मजबूत माना जा सकता है तो स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता की पत्नी का माना जा सकता है क्योंकि स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता पिछले लगभग चार दशकों से भाजपा से जुड़े हुए हैं और भाजपा जिला महामंत्री के रूप में सफलतापूर्वक अपने दो कार्यकाल भी पूर्ण किये और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भाजपा को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कभी भी पार्टी से अपने लिए कोई अपेक्षा भी नहीं की है, आज पार्टी को भी उन्हें कुछ देने की बारी आयी है तो उन्हें मिलना भी चाहिए। यदि किसी महिला नेत्री की टिकट दावेदारी कमजोर हो तो स्वतंत्र प्रकाश की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा सकती है।
इसके अलावा कई भाजपा के नेता ऐसे हैं जो पहले स्वयं के लिए टिकट के दावेदार थे लेकिन महिला सीट घोषित होने के बाद उनकी दावेदारी स्वतः ही समाप्त हो गयी, लेकिन फिर भी वह अपनी पत्नी या निकट संबंधी को टिकट दिलाने की जुगत में लगे हुए हैं।
यहां यह बात बताना भी आवश्यक है कि आने वाले 2019 में लोकसभा चुनाव होना है और ये निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव के रिहर्सल के रूप में भी देखे जा सकते हैं, क्योंकि इन चुनावों में जो पार्टी बाजी मारेगी उसका बहुत बड़ा असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा। अब देखना यह है कि पार्टी किसे अपना प्रत्याशी घोषित करती है और ऊंट किस करवट बैठता है।

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