बिसौली। नगर में अंजुमन ए आसी के द्वारा पुत्तन खां फ़हमी की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर एक मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की सदारत हाजी सगीर साहब ने और निज़ामत श्रीदत्त शर्मा मुजतर ने की। महफिल का आगाज शमा अफरोजी से हुआ। नात ए पाक पेश कर महफ़िल की शुरुआत की। नरेन्द्र पाठक अभाषित ने कहा जो हलाहल को पीना नहीं जानता। स्वेद श्रम का पसीना नहीं जानता। पाँव जिसका पड़ा शूल पर न कभी। वो हक़ीक़त में जीना नहीं जानता। मशहूद खां हमदम ने अपना कलाम यूं पेश किया हमदम पता चलेगा तभी पारसाई का। जब आईने के रु ब रु लाओगे ज़िंदगी। फ़स्ल-ए-बहार आ गयी हमदम न देर कर। है कब से मुन्तज़िर तेरा ज़िंदान ज़िंदगी। अभीक्ष पाठक आहत ने कहा वक़्त की चारा साजियां आहत, जख्म नासूर हो गया दिल का। श्री दत्त शर्मा मुजतर ने कहा अक़्ल को साथ लिए फिरता है। तुझसे होगा न प्यार रहने दे। मशकूर अहमद नज्मी ने कहा वो बिन मर्ज़ी भुलाना पड़ रहे हैं। बहुत आँसू बहाना पड़ रहे हैं। तबस्सुम की है उनके ज़र्ब इतनी। नए मरहम बनाना पड़ रहे हैं। अमीर उद्दीन अमीर ने कहा इश्क़ में इम्तिहान के आगे। ज़र्रे निकले चटान के आगे। फ़ैसला देखते हैं क्या होगा। जान रख दी है जान के आगे। फहीम अमिर ने कहा मीर साहब हताश बैठे हैं। लफ़्ज़ सारे निराश बैठे हैं। हुस्न को देखने की चाहत में। उंगलियों को तराश बैठे हैं। फरीद इदरीसी ने कहा ये जो आँखों में गर्म पानी है। सब तेरे प्यार की निशानी है। शब्बर खां शब्बर ने कहा जब सहारा छिन गया तो होश फ़ौरन आ गया। अब बहुत मसरूफ हूँ चाक-ए-गिरेबाँ सीने में। माजिद सलमानी ने कहा दफ़अतन चुप हो गए हज़रते आसी मगर। आपकी आवाज़ गूँजेगी फ़िज़ा में उम्र भर। महफिल में काजी शाहनवाज खान, एड. दीपक साहनी, एड. शशांक अग्रवाल आदि प्रमुखता से मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat