बिसौली। अहंकार और मोह मनुष्य की विवेक शक्ति को हर लेते हैं, जबकि भगवान की लीला के आगे बड़े-बड़े ज्ञानी भी नतमस्तक हो जाते हैं। इसी आध्यात्मिक संदेश को जीवंत करती नारद मोह की लीला ने आदर्श रामलीला कमेटी के रंगमंच पर भक्ति और आस्था की अनुपम छटा बिखेर दी। स्थानीय कलाकारों के सजीव अभिनय, भावपूर्ण संवाद और मनोहारी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को पौराणिक प्रसंग से जोड़ दिया। लीला के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रामलीला मंचन का शुभारंभ ग्राम प्रधानपति कुंवरसेन शाक्य ने फीता काटकर किया। इसके बाद मंच पर राजा शीलनिधि के दरबार और उनकी पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर की तैयारियों का दृश्य प्रस्तुत किया गया। राजा शीलनिधि की भूमिका में मुनेन्द्र सिंह ने प्रभावशाली अभिनय किया। इसी दौरान नारद मुनि की भूमिका निभा रहे गिरीश गुप्ता राजा के दरबार पहुंचे। राजा के आग्रह पर उन्होंने विश्वमोहिनी की हस्तरेखाएं देखीं। विश्वमोहिनी के रूप को देखकर नारद मुनि स्वयं मोहित हो गए और उससे विवाह करने की इच्छा पाल बैठे।
इसके बाद नारद मुनि भगवान श्रीहरि से सुंदर रूप प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। भगवान श्रीहरि की भूमिका में ओमवीर सिंह ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को प्रभावित किया। भगवान की लीला से नारद मुनि को वानर रूप मिल जाता है। उधर, स्वयंवर में पहुंचे भगवान श्रीहरि विश्वमोहिनी से विवाह कर लेते हैं। यह प्रसंग देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। मंचन ने संदेश दिया कि अहंकार और मोह व्यक्ति के विवेक को प्रभावित कर सकते हैं तथा ईश्वर की लीला मनुष्य की समझ से परे है। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष ऋषिपाल सिंह ठाकुर, अनेकपाल सिंह, पूर्व प्रधान सूर्य प्रताप, धर्मेंद्र शाक्य, सूरजभान, धीरेंद्र प्रताप, अरविंद तिवारी, ब्रह्मपाल सिंह, शिव सिंह, राठौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat