नाहर खां सराय में सुबह चार बजे तक चला मुशायरा व कवि सम्मेलन, पूर्व मंत्री आबिद रजा ने शायर को किया सम्मानित
बदायूं। नाहर खां सराय में शायर असरार अहमद खां मुज़्तर बदायूंनी की तीन पुस्तकों ‘नूर का पैकर’, ‘नूर का सागर’ और ‘नूर की बरखा’ का विमोचन भव्य मुशायरे एवं कवि सम्मेलन के बीच किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए शायरों और कवियों ने अपने कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। महफिल सुबह चार बजे तक चली।
कार्यक्रम फैज़ुल औलिया हजरत मौलाना गाजी मियां हुजूर की सरपरस्ती, मुख्तार तिलहरी की कयादत और असरार नसीमी एडवोकेट की सदारत में आयोजित हुआ। पूर्व मंत्री आबिद रजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि मुशायरे का संचालन मशहूर शायर डॉ. हिलाल बदायूंनी ने किया।
शमा रोशन करने की रस्म में मुख्तार तिलहरी, असरार नसीमी, डॉ. हिलाल बदायूंनी, असरार मुज़्तर, सुरेन्द्र नाज और डॉ. शम्स मुजाहिदी शामिल रहे। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक एवं शायर असरार मुज़्तर बदायूंनी की तीनों पुस्तकों का विमोचन पूर्व मंत्री आबिद रजा, मुख्तार तिलहरी, असरार नसीमी और डॉ. मुजाहिद नाज ने किया। इस मौके पर आबिद रजा ने असरार मुज़्तर को शॉल ओढ़ाकर और गुलपोशी कर बधाई दी।
कार्यक्रम की शुरुआत शाकिर रजा बदायूंनी ने नात-ए-पाक से की। इसके बाद मुख्तार तिलहरी सकलैनी, डॉ. मुजाहिद नाज बदायूंनी, असरार मुज़्तर बदायूंनी, डॉ. शम्स मुजाहिदी, नूरी परवीन, रोशन निजामी, सुरेन्द्र नाज और डॉ. हिलाल बदायूंनी सहित कई शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
मुशायरे में देशप्रेम, इंसानियत, मोहब्बत, सामाजिक सरोकार और बदलते दौर के विभिन्न पहलुओं को शायरी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। अरशद रसूल ने देश के बंटवारे के दर्द को शब्द दिए, जबकि नोमान मकनपुरी ने इंसानियत और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। शहजाद चंदौसवी ने महंगाई और गरीबों की परेशानी को अपनी शायरी में उठाया। अन्य शायरों ने भी अपने कलाम से श्रोताओं की दाद हासिल की।
इससे पहले कमेटी के अबरार, अब्बास, शोएब, डॉ. जकीर, तालिब, अताउर्रहमान, सलीम और अरबाज ने शायरों का गुलपोशी एवं प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया। अबरार मंजर ने अपने पिता असरार मुज़्तर की नात पेश की।
महफिल में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। श्रोताओं ने देर रात तक शायरों और कवियों के कलाम का आनंद लिया। अंत में असरार अहमद मुज़्तर बदायूंनी ने सभी अतिथियों, शायरों, कवियों और आयोजन में सहयोग करने वालों का आभार व्यक्त किया।
Budaun Amarprabhat