महिला बंदियों के घरों पर रह रहे बच्चों को भी सुरक्षित बचपन योजना से जोड़ने के निर्देश
बदायूं। सुरक्षित बचपन योजना के तहत महिला बंदियों के बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की जा रही है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन मानवेन्द्र सिंह ने निर्देश दिए हैं कि जिला कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों के जो बच्चे घरों पर रह रहे हैं, उन्हें भी योजना से जोड़कर पात्रतानुसार विभिन्न विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
इस संबंध में मंगलवार को संयुक्त निगरानी समिति ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षित बचपन योजना के तहत चिह्नित बच्चों की स्थिति और उनकी आवश्यकताओं की समीक्षा की गई। एडीएम प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय से आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और पात्र बच्चों को योजनाओं से लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिला कारागार में 11 बच्चे अपनी माताओं के साथ रह रहे हैं। समिति ने इन बच्चों की व्यक्तिगत देखरेख योजना (आईसीपी) का नियमित फॉलोअप करने और समय-समय पर उनकी काउंसलिंग कराने के निर्देश जिला बाल संरक्षण अधिकारी को दिए। बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, एसीएमओ और बाल रोग विशेषज्ञ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मेन्द्र कुलश्रेष्ठ, एसीएमओ डॉ. मोहन झा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नन्द किशोर पाठक, संरक्षण अधिकारी रवि कुमार एवं प्रीती कौशल, सामाजिक कार्यकर्ता भमरपाल सिंह, मुख्य सेविका पूनम यादव, जेलर शैलेश कुमार सोनकर और डिप्टी जेलर अनन्या अत्री सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat