उसहैत। मंदाकिनी साहित्य मंच के तत्वावधान में मदन गुप्ता के आवास पर एक भव्य एवं बृहद काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का सफल संयोजन चमन गुप्ता ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नंदकिशोर पाठक ने की। मंच का कुशल संचालन शायर मुशीर अहमद मुशीर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री रश्मिरथी द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वंदना से हुआ। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। ओजस्वी कवि आदेश कुमार सिंह ने देशप्रेम का संदेश देते हुए पढ़ा— “सबके दिल में सदा प्रेम गंगा बहे, धर्म मजहब में अब ना ही दंगा रहे…”। कवयित्री रश्मिरथी ने जिंदगी के फलसफे को बयां करते हुए पढ़ा— “थोड़ी सी खुशियां थोड़े से अजाब रहते हैं, मेरी आंखों में मुंफरिंद ख्वाब रहते हैं…”। जगपाल ‘जग’ ने अपनी रचना “हर फूल पे हिंदुस्तान लिखा है ऐसी शान हमारी है” से श्रोताओं में जोश भरा।
अमित अंबर ने साहित्य की उत्पत्ति को रेखांकित करते हुए पढ़ा— “भाल पर तुलसी ने जब चंदन मला कविता बनी, सूर का कान्हा लिए लकुटी चला कविता बनी…”। वहीं, युवा शायर अनीश कल्ब ने “मजलूम की सदाओं को कम समझ रहे हो, सब तख्तोताज तुमको हिलता दिखाई देगा” सुनाकर वाहवाही लूटी। राष्ट्रवादी कवि संतोष कुमार सिंह ने लक्ष्य प्राप्ति का संदेश दिया, जबकि संचालक मुशीर अहमद मुशीर ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए पढ़ा— “गजब तूफान है मेरा घर भी जा सकता है, सच अगर बोला तो मेरा सर भी जा सकता है”।
उर्दू के मशहूर शायर अब्दुल वहाब आजाद (आजाद भारती), सुरेश यादव, रामनरेश यादव, रामानंद मिश्रा, शंकरलाल और महेश ‘अग्निमुख’ ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत कीं। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रख्यात कवि नंदकिशोर पाठक ने देश के भविष्य पर कविता पढ़ते हुए कहा— “तभी हिंद देश खुशहाल बनेगा, दुनिया के देशों में मिसाल बनेगा…”।
देर रात तक चली इस काव्य गोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमामयी वातावरण में हुआ।
Budaun Amarprabhat