अमर प्रभात ब्यूरो
पंचकूला। चिन्मय मिशन पंचकूला द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित ‘बाल संस्कार शिविर’ का आज सफल समापन हुआ। शहर के सेक्टरों से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक के बच्चों के लिए आयोजित यह शिविर संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संगम का गवाह बना।
27 जून 2026 को आयोजित इस एक दिवसीय शिविर में 6 से 14 वर्ष की आयु के लगभग 50 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मिशन की आचार्य ब्रह्मचारिणी कालिंदी जी के मार्गदर्शन में गणपति पूजा, शिवलिंग अभिषेक और हवन के साथ हुआ। सुबह 7:30 बजे से शुरू हुए इस शिविर में बच्चों को न केवल आध्यात्मिक शिक्षा दी गई, बल्कि उनके शारीरिक विकास के लिए सूर्य नमस्कार और योग के कठिन आसन भी सिखाए गए।
शिविर में बच्चों की रुचि का विशेष ध्यान रखा गया। आर्ट एंड क्राफ्ट की गतिविधियों के जरिए बच्चों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई, वहीं कहानियों के माध्यम से उन्हें प्राचीन धर्म ग्रंथों और महापुरुषों की शिक्षाओं से रूबरू कराया गया। जीवन के लक्ष्यों और रुचियों पर हुई चर्चा में बच्चों ने बढ़-चढ़कर अपनी बात रखी। इस दौरान बच्चों द्वारा पेश किए गए भजनों और नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
चिन्मय मिशन के उद्देश्यों को चरितार्थ करते हुए इस शिविर में ‘पर्यावरण सुरक्षा’ को प्राथमिकता दी गई। शिविर के समापन पर मेधावी बच्चों को पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही, सभी बच्चों को ‘तुलसी’ के पौधे भेंट किए गए, ताकि वे अपने घर में रहकर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति प्रेम की सीख लें।
इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता समाज के हर वर्ग के बच्चों का एक साथ होना रही। इसमें 15 बच्चे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से शामिल थे, जिन्हें मिशन द्वारा हर सप्ताह ‘बाल विहार’ कक्षा के माध्यम से संस्कारवान बनाया जा रहा है।
आचार्य ब्रह्मचारिणी कालिंदी जी ने कहा कि चिन्मय मिशन का मूल उद्देश्य ‘अधिक से अधिक लोगों को, अधिक से अधिक समय के लिए, अधिक से अधिक खुशी’ प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि संस्कारित बचपन ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव है।
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