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TET अनिवार्यता के विरोध में गरजे शिक्षक, महासंघ ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बदायूँ में जोरदार प्रदर्शन
बदायूँ। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने के आदेश के खिलाफ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को जनपद बदायूँ में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) के बैनर तले कलेक्ट्रेट परिसर में जुटे सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इसके उपरांत, संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी बदायूँ के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट श्री सुमित कुमार को सौंपा।
शिक्षकों को संबोधित करते हुए महासंघ के जिला संयोजक दुष्यंत कुमार रघुवंशी ने कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, योग्यताओं और चयन प्रक्रिया के आधार पर पूर्ण रूप से वैध थीं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर बाद में तय किए गए मानकों को जबरन थोपना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और उनके सम्मान को ध्यान में रखते हुए इस जटिल समस्या का कोई उचित व सकारात्मक समाधान निकाले।
महासंघ के जिला सह संयोजक प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर देश के सभी 780 जनपदों में एक साथ यह ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। न्यायालय के इस आदेश से देश और प्रदेश के लाखों शिक्षकों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से पुरजोर अपेक्षा की कि वैध नियमों के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों के हितों की हर हाल में रक्षा की जाए। वहीं, जिला सह संयोजिका सोनी गुप्ता ने साफ लफ्जों में कहा कि यह तो आंदोलन का प्रथम चरण है। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय कर संघर्ष को और धार दी जाएगी।
इस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम का कुशल संचालन नंदिनी बरनवाल द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से अंकुर कुमार, धीरज शर्मा, लखेंद्र सिंह राठौर, जितेंद्र सिंह, कर्मेंद्र यादव, मुकेश कुमार, परमवीर सिंह, अनुराग गुप्ता, नंद किशोर पाठक, आदेश कुमार सिंह, विपिन कुमार, मयंक शर्मा, मनोज कुमार, मुकुल राठौर, शुभम सक्सेना, हिमांशु सक्सेना, भानुप्रताप सिंह, सुधीर साहू, आशीष गुप्ता, प्रशांत वर्मा, निशांत शर्मा, शिवओम शर्मा, रितेश सक्सेना, अरविंद कुमार, रीत रानी, शशी परिहार, मंजू रानी, रिंकी हरवंश, यशपाल सिंह, सचिन सक्सेना, राजेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह, प्रशांत कुमार, रीता रानी, काजल दुबे, उमेश कुमार गंगवार, अंकुश गुप्ता, पंकज चौहान, सोनी, सुखवेंद्र यादव, इंद्रेश यादव, हरिओम शाक्य, गुंजन सिंह, कपिल कुमार, कृष्ण कुमार, प्रगति कुमार, नितिन तोमर, मीरा, शुभम वशिष्ठ एवं आकांक्षा गौड़ सहित सभी ब्लॉकों के पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। महासंघ ने अंत में दोहराया कि शिक्षकों के सम्मान और हक की रक्षा के लिए उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।


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