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अमेरिका की यूनिवर्सिटी ने शरद शंखधार को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया

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अमेरिका की यूनिवर्सिटी ने शरद शंखधार को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया

38 वर्ष तक निरंतर हिंदी पत्रकारिता की सेवा करने पर डाक्टरेट(phd) की मानद उपाधि दी गई

बदायूं। वर्ल्ड कल्चर एंड एजुकेशन ऑर्गनाइजेशन की ओर से गत दिवस दिल्ली के पांच सितारा होटल में भव्य समारोह हुआ। इसमे अमेरिका की cedarbrook university ने वरिष्ठ पत्रकार शरद शंखधार को 38 वर्ष तक निरंतर हिंदी पत्रकारिता की सेवा करने और वर्तमान में भी सक्रिय रहने पर डाक्टरेट (पीएचडी) की मानद उपाधि औऱ गोल्ड मैडल दिया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पहलवान दारा सिंह के पुत्र एव फ़िल्म अभिनेता बिंदूदारा सिंह ने दर्जनों देश के जाने माने प्रतिष्ठित लोगों और सेलिब्रिटी लोगो की मौजूदगी में अमेरिका की यूनिवर्सिटी की ओर से पत्रकार शरद शंखधार को डाक्टरेट की मानद उपाधि,प्रमाणपत्र, शपथपत्र औऱ गोल्ड मैडल प्रदान किया। उन्होंने बेच लगा कर व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
ऑर्गनाइजेशन औऱ यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने अपने सम्बोधन में कहा वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार शरद शंखधार पिछले 38 वर्षों से निरन्तर हिंदी पत्रकारिता की सेवा कर रहे है,वर्तमान में भी सक्रिय है। 18 से अधिक राष्ट्रीय,छेत्रिय व स्थानीय हिंदी के समाचार पत्र,पत्रिकाओं, न्यूज़ एजेंसी में सम्पादकीय विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इनमें एक हजार से अधिक विशेष स्टोरी,फीचर,कहानी,इंटरव्यू, संस्मरण, रिपोर्ट, लेख प्रकाशित हुए है। इनके पसंदीदा विषय क्राइम,राजनीति, सड़क,दंगे,आतंकवाद,जनसमस्याएं,ट्रैफिक आदि है। इन विषयों पर उल्लेखनीय कार्य किया है,बहुत लिखा है। इनकी दो पुस्तक नई कहानी व नई कविता पर प्रकाशित हो चुकी है।
शरद शंखधार ने राष्ट्रीय व छेत्रिय हिंदी समाचार पत्रों की ओर से महाराष्ट्र, दिल्ली,लखनऊ, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड समेत सात राज्यों के 25 से अधिक जनपदों में प्रतिनिधि के रूप में तैनात रह कर धरातल पर पत्रकारिता की है। आम जनता का दुःख दर्द जाना औऱ समझा तथा स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता के साथ जोरदार ढंग से उठाया है।
शरद शंखधार ने यूपी के बदायूं शहर में 28 सितम्बर 1989 को उर्दू को द्वितीय राजभाषा बनाने पर हुए साम्प्रदायिक दंगे के दौरान रिपोर्टिंग करने के साथ हिन्दू-मुस्लिम के मध्य समन्वय बनाने,साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के सार्थक प्रयास किए। इसके लिए तत्कालीन जिलाधिकारी शिशिर प्रियदर्शी ने प्रशंसा पत्र भी दिया।
वर्ष 1992 का रामजन्मभूमि आंदोलन और बाबरी मस्जिद विध्वंस व साम्प्रदायिक दंगे के दौरान भाजपा के शीर्ष नेताओं,रामजन्मभूमि आंदोलन से सीधे जुड़े प्रमुख संतो के इन्टरव्यू प्रकाशित किए। साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले लेख व समाचार प्रकाशित किए और व्यक्तिगत सार्थक प्रयास भी किए।
वर्ष 2012 व 2013 में जब जम्मू कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था,तब एक साल तक एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र के सम्पादकीय विभाग में महत्वपूर्ण पद पर रह कर आतंकवाद को करीब से देखा व समझा।
उन्होंने कहा कि शरद शंखधार ने उत्तराखंड के हल्द्वानी व नैनीताल में प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र के उप सम्पादक रहने के दौरान बदहाल सड़को,यातायात व्यवस्था,ऑटो से होने वाली दुर्घटनाओं व लगने वाले जाम पर पुलिस के साथ मिल कर उल्लेखनीय कार्य किया,लेखनी के माध्यम से जागरूक व सतर्क किया। उत्तराखंड के पूर्णागिरि धाम पर एक वर्ष तक अखबार के स्थानीय प्रतिनिधि के रूप में इस धाम के बारे में बहुत लेखन कार्य किया और जनसमस्याएं उठाई।
देश के विद्वान व नामचीन सम्पादकों, साहित्यकार व लेखकों के साथ पत्रकारिता की,खुद भी प्रमुख अखबारों के उप सम्पादक,सम्पादक,राजनीतिक सम्पादक,विशेष संवाददाता आदि रह चुके है। इन्हें राष्ट्रीय, प्रांतीय औऱ स्थानीय स्तर के सौ से अधिक पुरस्कार मिल चुके है।
यह सामाजिक समरसता,महिला शसक्तीकरण, पर्यावरण, स्वास्थ्य,शिक्षा के छेत्र में सामाजिक कार्यो में भी सक्रिय रहते है और समय समय पर कार्यक्रम आयोजित करते रहते है। वर्तमान में एक डिजिटल न्यूज़ चैनल के प्रधान सम्पादक औऱ प्रमुख हिंदी समाचार पत्र के बिजनेस एसोसिएट है। इसी साल 04 मई को यूपी में डिजीटल मीडिया में नया एव सफल प्रयोग करने के लिए दिल्ली में आयोजित समारोह में फ़िल्म अभिनेत्री अमीषा पटेल ने इन्हें सम्मानित किया था।


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