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शिक्षा और संस्कारों का संगम: 59 वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है नेहरू मेमोरियल शिव नारायण दास कॉलेज

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‘सत्यम शिवम् सुन्दरम्’ के आदर्श वाक्य को मानकर हर वर्ष 5500 से अधिक छात्र-छात्राएं लेते हैं प्रवेश
रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, आधुनिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम से सुसज्जित है बदायूँ का यह गौरवशाली कैंपस

बदायूँ। नेहरू मेमोरियल शिव नारायण दास महाविद्यालय की विकास यात्रा का प्रारम्भ उसके ध्येय वाक्य ‘सत्यम शिवम् सुन्दरम्’ को आदर्श मानकर होता है। जिसका सीधा अर्थ है कि कोई भी नीति अथवा शिक्षा तभी ग्रहण करने योग्य है जब वह सत्य हो, जन-कल्याणकारी हो तथा सुन्दर हो। इसी मूल मंत्र का अनुपालन करते हुए जनपद बदायूँ का श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान “नेहरू मैमोरियल शिव नारायण दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय” अपने कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर है। बरेली-आगरा मुख्य मार्ग के उत्तर में स्थित यह महाविद्यालय न केवल बदायूँ जनपद में, अपितु सम्पूर्ण रोहिलखण्ड क्षेत्र में अपनी गुणवत्तापरक शिक्षा हेतु विख्यात है। यही कारण है कि समूचे क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के लिए यह संस्थान आज भी उच्च शिक्षा के लिए प्रथम वरीयता में स्थापित है।

मनीषी सेठ शिव नारायण दास जी ने 1967 में रखी थी नींव

समाज के लिए शिक्षा की महती आवश्यकता को सामने रखकर महाविद्यालय की परिकल्पना को साकार स्वरूप प्रदान करने वाले मनीषी व प्रख्यात समाजसेवी सेठ शिव नारायण दास जी ने सन 1967 में इस महाविद्यालय की स्थापना की थी। इस पुनीत कार्य में सेठ रामरक्ष पाल जी एवं सेठ राम गोपाल जी वैश्य का प्रमुख योगदान रहा है। वर्ष 1967 में आगरा विश्वविद्यालय के कला संकाय से इस महाविद्यालय को स्नातक स्तर पर अध्यापन के लिए 12 विषयों की मान्यता प्राप्त हुई थी।

इसके मात्र दो वर्ष पश्चात्, वर्ष 1969 में ही महाविद्यालय को हिन्दी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र में परास्नातक कक्षाओं को संचालित करने की मान्यता मिल गयी। इसके बाद वर्ष 1970 में अंग्रेजी विषय से परास्नातक और सन् 1988 में बी.एस-सी (PCM) एवं बी.एड. की कक्षाएं प्रारम्भ हो गईं।

बदलते दौर के साथ जुड़े आधुनिक व रोजगारपरक पाठ्यक्रम

वर्तमान समय में स्ववित्त पोषित योजना के अन्तर्गत यहाँ स्नातक स्तर पर बी.एस-सी. (ZBC), बी.ए. (भूगोल), बी.ए. (गृह विज्ञान), बी.बी.ए. एवं परास्नातक स्तर पर एम.कॉम, एम.एस-सी. (गणित), एम.ए. (गृह विज्ञान) तथा एम.ए. (भूगोल) जैसे बेहतरीन पाठ्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हैं।

वर्तमान में इस महाविद्यालय में 34 पूर्णकालिक एवम् अनेक योग्य अनुमोदित स्व-वित्तपोषित तथा अंशकालिक प्राध्यापक व प्राध्यापिकाएं कार्यरत हैं। वर्तमान में यहाँ अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की कुल संख्या लगभग 5500 है, जो इस संस्थान के प्रति जन-विश्वास को दर्शाती है।

विश्वविद्यालय स्तर का बुनियादी ढांचा और संसाधन

महाविद्यालय का परिसर अत्यंत भव्य और विशाल है, जिसमें लगभग 50 शिक्षण कक्ष, सभी विभागों के विशेष कक्ष, एक समृद्ध पुस्तकालय और वाचनालय स्थित है। इसके अलावा यहाँ भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, संगीत, भूगोल तथा गृहविज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं एवम् एक सुसज्जित कम्प्यूटर प्रशिक्षण कक्ष है।

भूमंडलीकरण के इस प्रतिस्पर्धापूर्ण वातावरण को सुगम बनाने के लिए यहाँ डिजिटल आवश्यकताओं के अनुरूप स्मार्ट क्लासरूम का निर्माण कराया गया है। छात्रों के अन्दर योग्यता बढ़ाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन, विभागानुसार गोष्ठियां और विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर आधारित शोध सर्वे का कार्य समय-समय पर किया जाता है। कुशल निर्देशकों के मार्गदर्शन में यहाँ 50 से अधिक शोध छात्र अपना शोध कार्य पूर्ण कर रहे हैं। परिसर में विद्युत की अबाध आपूर्ति के लिये दो जैनरेटर कक्ष भी बनाए गए हैं।

खेलकूद, एनसीसी और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अव्वल

छात्रों के स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास के लिये यहाँ शारीरिक शिक्षा विभाग है, जिसके अन्तर्गत एक विशाल क्रीड़ांगन (खेल का मैदान) मौजूद है। जहाँ छात्रों के नियमित अभ्यास के अतिरिक्त वार्षिक क्रीड़ा समारोह भी आयोजित होता है। इसके साथ ही महाविद्यालय में देश सेवा और अनुशासन की भावना जगाने के लिए एन.एस.एस. की तीन इकाइयाँ, एन.सी.सी. की इकाई, रोवर्स (छात्र) एवं रेंजर्स (छात्रा) की इकाइयाँ विगत अनेकों वर्षों से सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं।

सांस्कृतिक मंच के लिए कॉलेज परिसर में 500 से अधिक दर्शक क्षमता का एक वृहद सभागार भी उपलब्ध है। प्रबंधन का संदेश: “वर्तमान में प्रबंध समिति के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश वैश्य और सचिव मोहित आनंद के संरक्षण तथा प्राचार्य डॉ. प्रशांत कोहली के कुशल निर्देशन में यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा में निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। यह संस्थान राष्ट्रीय एकता तथा समग्र मानवता के उत्थान के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”


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