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ढाई साल से खुला नाला बना ‘मौत का रास्ता’, क्या बड़े हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?

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400 मीटर निर्माण, लेकिन सुरक्षा शून्य… हर दिन डर के साए में गुजर रही ग्रामीणों की जिंदगी
स्वार तहसील के ग्राम मझरा मेहंदी नगर का मामला; ग्रामीणों ने हाथ उठाकर जताया विरोध, दी आंदोलन की चेतावनी

रामपुर। तहसील स्वार क्षेत्र के ग्राम मझरा मेहंदी नगर में जिला पंचायत द्वारा लाखों की लागत से बनवाया गया सीमेंटेड नाला अब ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय आफत का सबब बन चुका है। करीब 400 मीटर लंबे इस नाले का निर्माण हुए ढाई साल का लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन आज तक इस पर सुरक्षा के लिए स्लैब नहीं डाले गए। नतीजा यह है कि यह खुला नाला गांव के बीचो-बीच हर दिन किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।

बच्चे और बुजुर्ग हो रहे शिकार, हर पल बना रहता है डर

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खुले नाले के कारण आए दिन कोई न कोई दुर्घटना होती रहती है। अब तक कई बच्चे और बुजुर्ग इस गहरे नाले में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। नाले की गहराई और चौड़ाई इतनी अधिक है कि जरा सी चूक भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। सबसे ज्यादा खौफजदा वे परिवार हैं, जिनके मासूम बच्चे रोजाना इसी रास्ते से होकर स्कूल और खेल के मैदान की तरफ निकलते हैं।

ग्रामीणों की दो टूक:

“निर्माण के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट तो कर दिया गया, लेकिन जनता की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। क्या सरकारी फाइलों में सुरक्षा का कोई बजट नहीं था? आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?”

आक्रोशित ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

प्रशासनिक उदासीनता से नाराज भारी संख्या में ग्रामीणों ने मौके पर एकत्र होकर हाथ उठाकर जोरदार प्रदर्शन किया और संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाले को ढकने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों के सुलगते सवाल:
1. क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही हरकत में आएगा?
2. निर्माण कार्य पूरा होने के ढाई साल बाद भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
3. जनता के टैक्स के पैसे से बने इस नाले की बदहाली की जांच कब होगी?

अमर प्रभात ग्राउंड रिपोर्ट: दावों की खुली पोल

‘अमर प्रभात’ की टीम ने जब मौके पर जाकर जमीनी हकीकत देखी, तो स्थिति बेहद डरावनी नजर आई। घनी आबादी के बीच से गुजर रहा यह ४०० मीटर लंबा नाला पूरी तरह से खुला पड़ा है। ढाई साल बीत जाने के बाद भी इसे ढकने या इसके किनारे बैरिकेडिंग करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लापरवाही का आलम यह है कि पूरा गांव अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

तत्काल स्लैब डालने की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी रामपुर और संबंधित विभागीय उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। नाले पर अविलंब मजबूत स्लैब डलवाई जाए ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके, साथ ही इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त जांच कर कार्रवाई की जाए।


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