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बदायूं। राजकीय महाविद्यालय, बदायूं के गणित विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय शोध उपलब्धि प्राप्त कर महाविद्यालय, जनपद तथा प्रदेश का नाम वैश्विक शैक्षणिक मंच पर स्थापित किया है। डॉ. सचिन कुमार ने भारत एवं चिली (साउथ अमेरिका) के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जैव-गणित एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संगणकीय विज्ञान के क्षेत्र में एक अभिनव शोध कार्य संपन्न किया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहभागिता एवं वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी के अंतर्गत संपन्न किया गया, जिसमें चिली के प्रो. डेविड लारोज़े, इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडीज़, यूनिवर्सिटी ऑफ तारापाका, एरिका, चिली के साथ संयुक्त रूप से अनुसंधान कार्य किया गया।
उनका शोधपत्र “भिन्नात्मक अवकल समीकरणों एवं बर्नस्टीन बहुपद आधारित तंत्रिका-जाल के माध्यम से यकृत गतिशीलता का प्रतिरूपण एवं विश्लेषण” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। विशेष उपलब्धि यह है कि यह शोध विश्व के अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध-पत्रिका “कैओस, सॉलिटॉन्स एंड फ्रैक्टल्स” में प्रकाशित हुआ है। यह शोध-पत्रिका विश्वविख्यात प्रकाशन समूह एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित की जाती है तथा इसे वैश्विक स्तर पर प्रथम श्रेणी (क्यू–एक) की शोध-पत्रिका माना जाता है। इस शोध-पत्रिका का प्रभाव गुणांक 5.7 है, जो इसकी उत्कृष्ट शोध गुणवत्ता एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
इस शोध में यकृत एवं रक्त के मध्य होने वाली जटिल जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन हेतु भिन्नात्मक अवकल समीकरण, कैपुटो भिन्नात्मक अवकलज, भौतिकी-सूचित तंत्रिका-जाल तथा बर्नस्टीन तंत्रिका-जाल जैसी अत्याधुनिक गणितीय एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने ऐसा उन्नत गणितीय प्रतिरूप विकसित किया जो पारंपरिक विधियों की तुलना में अधिक सटीक, स्थिर तथा प्रभावी सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय, बदायूं की प्राचार्या डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने डॉ. सचिन कुमार एवं उनकी शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि महाविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय बदायूं निरंतर उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है तथा संकाय सदस्यों की ऐसी उपलब्धियां विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगी।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. सचिन कुमार द्वारा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिका में प्रकाशित यह शोध महाविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान संस्कृति तथा वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महाविद्यालय के शिक्षक एवं शोधकर्ता इसी प्रकार उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित कर संस्थान एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।
Budaun Amarprabhat