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पुण्य रूपी धन कमाने को ही मनुष्य देह मिली है: आचार्य रूप

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पुण्य रूपी धन कमाने को ही मनुष्य देह मिली है: आचार्य रूप

गुधनी प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में वेद कथा का दूसरा दिन

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय वेद कथा के दूसरे दिन कथाकार आचार्य संजीव रूप ने कहा कि धन दो प्रकार का होता है, एक धन वह होता है जो नौकरी करके, खेती करके, मजदूरी करके या व्यापार करके कमाया जाता है। उस धन को हम अनेक प्रकार के सुख सुविधाओं के लिए उपयोग में लाते हैं किंतु दूसरा धन वह होता है जो पुण्य कहलाता है और वह धन औरों को सुख देने से मिलता है। दुःखी लोगों के साथ अगर आप दुःखी होते हैं तो आपका पुण्य रूपी धन बढ़ता है। आप प्यासे को पानी पिलाकर, भूखे को भोजन खिलाकर, निर्वस्त्र को वस्त्र देकर, जरूरतमंद की जरूरत पूरी करके और साथ ही अच्छे को अच्छा कहकर और बुरे को बुरा कह कर पुण्य कमा सकते हैं। यह पुण्य रूपी धन परम शांति देता है। यह धन परलोक में भी साथ जाता है। कथा से पूर्व प्रश्रय आर्य जय, इशू आर्य, तृप्ति शास्त्री, कोशिकी रानी ने सुंदर भजन सुनाए। कथा में मास्टर अगर पाल सिंह, विश्वजीत आर्य , राकेश आर्य, अनुज कुमार सिंह, चन्नू सिंह, दुर्वेश कुमार सिंह, भुवनेश कुमार सिंह, बद्रीप्रसाद आर्य, गोपाल उपाध्याय, विशेष कुमार आदि मौजूद रहे।


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