कादरचौक ब्लॉक संसाधन केंद्र, असरासी पर बुनियादी भाषा एवं संख्या ज्ञान (एफ.एल.एन.) एवं एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्य पुस्तकों पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण के तृतीय दिवस पर नोडल ए.आर.पी. (विज्ञान) रत्नेश कुमार ने एफ.एल.एन. के अंतर्गत संख्यात्मकता के सत्रों के विकास के आधार पर बिंदुओं जैसे- कठिन अधिगम वाली अवधारणाएं- स्थानीय मान, जोड़ और घटाव। कक्षा 1 से 3 तक सामग्री में नए बदलावों को समझना। अवधारणा के परिचय का विस्तार। संख्यात्मकता अवधारणाओं के शिक्षण में सामने आने वाली चुनौतियों। छात्रों के सीखने के परिणामों पर आधारित आंकड़ों का विश्लेषण पर विस्तृत चर्चा की। ए.आर.पी. (हिंदी) शैलेन्द्र सिंह ने 20 तक वस्तुओं की गिनती एवं संख्या पहचाना। अपने परिवेश आकृतियों और संख्याओं में सरल पैटर्न की पहचान करना एवं आगे बढ़ाना। अमानक एवं असमान इकाइयों जैसे- हाथ, पैर, उंगलियों आदि का उपयोग करके लंबाई का अनुमान लगाना, समान इकाइयों जैसे- कप, चम्मच, मग आदि का उपयोग करके धारिता का मापन करना। रुपए 20 तक की भारतीय मुद्रा (नोट एवं सिक्के) पहचाना। 99 तक की वस्तुओं को गिनना और संख्या बोध होना। विभिन्न आकृतियों और संख्याओं से नए पैटर्न बनाना। रुपए 100 तक की मुद्रा के प्रयोग से सरल लेन देन करना। ए.आर.पी. (अंग्रेजी) अंजुम खान ने प्रशिक्षण का एजेंडा के सातों सत्रों पर बखूबी प्रकाश डाला। संदर्भ दाता पूर्व ए.आर.पी. सुनील कुमार, डॉ. जुगल किशोर (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक), विनीत सोलंकी, परमानंद, परमवीर सिंह दीवला, जाकिर अली खान, जितेंद्र कुमार, अंकित गुप्ता, जमीर अहमद, कमल किशोर, ललित माहेश्वरी, फरहत जावेद, भावना पटेल, मोहम्मद जुबेर खान, कफील अहमद खान, शाहनवाज खान, भावना मित्तल, साकिब अली खान, मोहिनी गुप्ता, रिचा गर्ग, हरेंद्र मोहन, रूमाना बेगम, ज्योति, लालाराम, मोहम्मद नावेद, देवेंद्र कुमार, सोमेश चंद्र, नेहा सक्सेना,सना मुजम्मिल आदि।
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