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इंसान अहंकार में भगवान को भी नहीं पहचान पाता है

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इंसान अहंकार में भगवान को भी नहीं पहचान पाता है

बिल्सी में रामकथा का चौथा दिन

बिल्सी। कछला रोड स्थित माहेश्वरी भवन में चल रही रामकथा में ऋषिकेश से पधारे कथावाचक अयोध्यादास रामायणी महाराज ने कथा के चौथे दिन श्रीराम व माता सीता के विवाह की आनन्द दिव्य कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान राम, लक्ष्मण अपने गुरु विश्वामित्र के साथ सीता स्वयंवर में भाग लेने को जनकपुरी पहुंचे। वहां भगवान श्रीराम की माता सीता से पुष्प वाटिका में भेंट होती है। दोनों एक दूसरे को निहारते और मंद-मंद मुस्कुराते हैं। मां सीता मंदिर में जाकर सखियों के साथ गौरी पूजन कर भगवान श्रीराम को अपने मन मंदिर में विराजित कर लेती हैं। उन्होंने भगवान लक्ष्मण परशुराम संवाद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो अहंकार के वशीभूत हो जाता है वह सामने खड़े भगवान को भी नहीं पहचान पाता है। लेकिन भगवान स्वयं ही सामने आकर अपने भक्त के अंधकार रूपी अहंकार दमन करते हैं, जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने भगवान परशुराम के अहंकार का दमन किया। कथा प्रसंग में महाराज ने सीता स्वयंवर की मार्मिक लीला का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा में पहुंचे विधायक हरीश शाक्य एवं जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने महाराज से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर मटरुमल शर्मा महाराज, गोरेलाल व्यास, पूर्व चैयरमेन ओमप्रकाश सागर, अजय प्रताप सिंह, नरेन्द्र गरल, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, नीरज माहेश्वरी, सुवीन माहेश्वरी, सत्यपाल गुप्ता, दिनेश बाबू आदि मौजूद रहे।


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