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मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार होता है : प्रश्रय आर्य जय

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*मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार होता है : प्रश्रय आर्य जय

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    बिल्सी, तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया । यज्ञ के पश्चात सत्संग का आयोजन किया गया ! पंडित प्रश्रय आर्य जय ने कहा ‘मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार है ! धनवानों को धन का अहंकार है बलवानों को बल का रूप वालों को रूप का विद्वानों को विद्या का अहंकार होता है , जो व्यक्ति अहंकार से ऊपर उठ जाता है वह समाज में पूज्य होता है ! रावण चारों वेदों का विद्वान था पर विद्यावान नहीं था , क्योंकि विद्यावान वह होता है जो विनम्र होता है अहंकारी नहीं होता ! श्री राम एक वेद ही पढ़े थे किंतु विद्यावान थे क्योंकि विनम्र थे ! आर्य संस्कारशाला के बच्चों ने सुंदर भजन गाए । श्रीमती सूरजवती देवी,विचित्रपाल सिंह,राकेश आर्य, मास्टर अगर पाल सिंह, दुष्यंत सिंह, श्रीमती कमलेश कुमारी आदि मौजूद रहे !


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