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मॉरीशस में डॉ. अंजना सिंह सेंगर के व्याख्यान ने छोड़ी अमिट छाप

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मॉरीशस: विश्व हिंदी सचिवालय के 18वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत की प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. अंजना सिंह सेंगर के वक्तव्य की गूँज सुनाई दी। ‘हिंदी काव्य का अध्यापन और अध्ययन’ विषय पर केंद्रित इस एक दिवसीय संगोष्ठी में दुनिया भर के हिंदी विद्वानों और साहित्यकारों ने शिरकत की।

सूरदास के पदों पर डॉ. सेंगर का विद्वतापूर्ण व्याख्यान…

​अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने ‘भारत में सूरदास के पदों का अध्यापन और अध्ययन’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक समय में छात्र-छात्राओं को सूरदास की भक्ति और काव्य से किस प्रकार जोड़ा जा रहा है। उनके प्रभावशाली विचारों और प्रस्तुति शैली ने सभागार में उपस्थित अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी विद्वता का सम्मान करते हुए, मुख्य अतिथि डॉ. महेंद गंगापरसाद (शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री, मॉरीशस) ने डॉ. सेंगर के वक्तव्य की मुक्त कंठ से सराहना की और उन्हें सचिवालय का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
​विशिष्ट अतिथि श्रीमती अपर्णा गणेसन (भारतीय उप-उच्चायुक्त) ने साहित्य पठन-पाठन के लिए डॉ. सेंगर द्वारा सुझाए गए नवीन तरीकों को अत्यंत प्रेरणादायक बताया।

​कविता और कला का अनूठा संगम: विशेष प्रदर्शनी…

​समारोह का एक मुख्य आकर्षण उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से आई विशेष प्रदर्शनी रही। संस्कार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन और बद्रीनारायण सिंह ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के विद्यार्थियों व शिक्षकों द्वारा तैयार की गई इस प्रदर्शनी में हिंदी साहित्य के चार स्तंभों—सूरदास, निराला, पंत और महादेवी वर्मा—की रचनाओं को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया गया।
​इस प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. महेंद गंगापरसाद, विशिष्ट अतिथि श्रीमती अपर्णा गणेशन और सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी रामधारी ने संयुक्त रूप से किया।

​वैश्विक मंच पर हिंदी की प्रतिबद्धता…

​यह आयोजन न केवल हिंदी के वैश्विक प्रसार का प्रतीक बना, बल्कि भारत और मॉरीशस के बीच भाषाई संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। विश्व हिंदी सचिवालय अपनी स्थापना के 18 वर्षों के सफर में हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के संकल्प को निरंतर दोहरा रहा है।


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