बदायूं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को मालवीय आवास गृह में “नारी मुक्ति का सवाल और हमारे कार्यभार” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रसोइया कर्मी जरीना बेगम ने की, जबकि संचालन आंगनवाड़ी संगठन की जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमारी ने किया। गोष्ठी की मुख्य वक्ता आशा संगिनी की जिलाध्यक्ष जौली वैश्य रहीं।
वक्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनियाभर की मेहनतकश महिलाओं के लिए हर प्रकार के शोषण, उत्पीड़न और गैरबराबरी के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी में संवैधानिक और कानूनी अधिकार लागू होने के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अन्याय और अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सामाजिक प्रगति के बावजूद महिलाओं की स्थिति आज भी दोयम दर्जे की बनी हुई है और वे कई प्रकार की सामाजिक बेड़ियों में जकड़ी हुई हैं।
वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को जहां भी अवसर मिला है, उन्होंने यह साबित किया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और भेदभाव के खिलाफ जागरूक होकर संघर्ष करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा कि मजदूर और मेहनतकश वर्ग की महिलाओं को आज भी गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है।
गोष्ठी में कहा गया कि आठ मार्च का दिन महिलाओं के संघर्षों को याद करने और भविष्य के लिए संगठित होकर आगे बढ़ने का संकल्प लेने का दिन है। यह दिन उन सभी शहीदों को याद करने का भी अवसर है जिन्होंने शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति दी।
कार्यक्रम को मिथलेश कुमारी, जौली वैश्य, जरीना बेगम, ममता भदौरिया, मनीषा, नीतू मिश्रा, निर्दोष राठौर, राजेश सक्सेना, रविकांत भारती, डॉ. सतीश, प्रेमपाल सिंह, कृष्ण गोपाल, राजेश जौहरी, राकेश, कॉमरेड नफीस अहमद सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
इस अवसर पर सुरेखा, विमला, अंजरा, रुबीना, रूबी, राबिया, रईसा, सितारा, रौनक, इस्मा सहित अनेक महिलाएं मौजूद
Budaun Amarprabhat