बिसौली। श्री लक्ष्मी नारायण बड़ा मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन पूज्य अंबिका देवी जी ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनाया। गोकुल में नंद बाबा को लगा कि यहां मेरे लाला पर बार-बार कंस के भेजे हुए रक्षक हमला कर रहे हैं, उन्होंने निर्णय किया कि हम गोकुल को छोड़कर वृंदावन पहुंच जाएंगे जहां मेरा परिवार सुरक्षित रहेगा। लेकिन कंस के गुप्तचर ने कंस को सूचना दी की कृष्ण बलराम वृंदावन आ गए हैं, उसने वहां पर भी अपने असुरों को भेज कर उपद्रव करने शुरू कर दिए। अब ब्रह्मा जी को भगवान के प्रति मोह हो गया, कि यह साधारण से ग्वाल वाले बछड़े गाय को चराने वाले भगवान कैसे हो सकते हैं उन्होंने अपनी लीला के द्वारा जंगल में भगवान के साथ खेल रहे ग्वाल वाले और बछड़ों को ब्रह्म लोक में अपनी माया से पहुंचा दिया भगवान ने जब यह देखा तो स्वयं बछड़े ग्वाल-वाल लाठी डंडे स्वयं बन गए कई दिनो बाद ब्रह्मा जी ने सोचा कि अब चल कर वृंदावन में देखे। देखा तो पहले जैसे सभी ग्वाल- बाल गाय बछड़े कृष्ण जी के साथ जंगल में घूम रहे हैं। ब्रह्म लोक में भी वही है ब्रह्मा जी को आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है ब्रह्मा जी को ज्ञान हुआ कि यह परमपिता परमेश्वर श्री कृष्ण है साधारण नहीं कंस वध की कथा सुनाते हुए बताया कि अक्रूर जी को भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा लाने के लिए कंस ने भेजा। मथुरा पहुंचकर भगवान ने कंस द्वारा भेजे गए हाथी और अन्य राक्षसों को मारा कुब्जा नाम की दासी से चंदन लेकर माथे पर लगाया धोबी से लेकर राजश्री वस्त्र पहने और कंस के सभागार में जहां धनुष यज्ञ का मेला था पहुंच गए और धनुष को उठाकर तोड़ दिया कंस घबरा गया क्योंकि यह धनुष परशुराम जी ने कंस को दिया था और बताया था जो इस धनुष को जो तोड़ेगा वही तुम्हारा कlल होगा भगवान कृष्ण ने कंस को मार कर अपनी माता देवी की और पिता वसुदेव को कारागार से मुक्त किया सभी देवता आकाश से पुष्प वर्षा करने लगे भगवान की जय जयकार करने लगे कथा में श्रद्धालुओं ने पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर अशोक कुमार अग्रवाल, सुरेश कुमार अग्रवाल, सोहेल अग्रवाल, निशांत अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, आकांक्षा शर्मा, सोना शर्मा, चंचल शर्मा, कुलदीप, नेत्रपाल, दयाराम, जगदीश, रामपाल, सुधीर गुप्ता, गुंजन गोयल, कविता आनंद, मंजू कथरिया, चंचल ठक्कर आदि उपस्थित रहे।