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विश्व एड्स दिवस पर गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में हस्ताक्षर अभियान व जागरूकता रैली आयोजित

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संवाददाता : गोविंद देवल, बदायूं

बदायूं। विश्व एड्स रोग दिवस के अवसर पर गुरुवार को गिंदो देवी महिला महाविद्यालय में एनएसएस इकाई के तत्वावधान में भव्य हस्ताक्षर अभियान, जागरूकता रैली, संगोष्ठी और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती तथा परियोजना निदेशक डीआरडीए अखिलेश चौबे ने संयुक्त रूप से की।

हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत परियोजना निदेशक अखिलेश चौबे और प्राचार्या सरला चक्रवर्ती ने अपने हस्ताक्षर कर की। तत्पश्चात मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला क्षय रोग अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रवक्ता, एनसीसी कैडेट्स और छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हस्ताक्षर किए।

इसके बाद महाविद्यालय परिसर से एड्स जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें छात्राओं ने एचआईवी/एड्स से बचाव संबंधी नारे लगाते हुए लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया। रैली को परियोजना निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्राचार्या ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

महाविद्यालय में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में कु. अनामिका ने प्रथम, कु. वैष्णवी ने द्वितीय और कु. साक्षी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्या द्वारा मेडिकल टीम के अधिकारियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए, वहीं डॉ. विनेश कुमार ने भी महाविद्यालय प्रशासन को विशेष सहयोग के लिए स्मृति चिन्ह प्रदान किए।

संगोष्ठी में परियोजना निदेशक अखिलेश चौबे ने कहा कि “एचआईवी/एड्स का कोई इलाज नहीं है, जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। यह मात्र चार कारणों से फैलता है, इसलिए युवाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए और दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।”

जिला क्षय रोग अधिकारी/जिला कार्यक्रम अधिकारी एड्स डॉ. विनेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष विश्व एड्स दिवस की थीम “बाधाएँ होंगी दरकिनार, एचआईवी और एड्स पर होगा सशक्त प्रहार” रखी गई है। उन्होंने कहा कि संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित सिरिंज के उपयोग, संक्रमित मां से जन्मे बच्चे और असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। उन्होंने हाई-रिस्क ग्रुप जैसे सेक्सुअल वर्कर, सिरिंज से नशा करने वाले, ट्रक ड्राइवर, डॉक्टर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ में संक्रमण की संवेदनशीलता अधिक बताई।

एसटीएस बृजेश राठौर ने सलाह दी कि इंजेक्शन हमेशा नई सिरिंज से लगवाएं, नाई से सेविंग कराते समय नया ब्लेड इस्तेमाल कराएं और रक्त की आवश्यकता होने पर केवल प्रमाणित ब्लड बैंक से रक्त लें। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे कम से कम अपने दो पड़ोसियों को एड्स के बारे में अवश्य जागरूक करें।

प्राचार्या डॉ. सरला चक्रवर्ती ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं के माध्यम से समाज में व्यापक जागरूकता फैलाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति से किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए।”

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शिल्पी तोमर ने किया। इस अवसर पर समाजशास्त्र विभाग की प्रो. डॉ. इति अधिकारी और अंग्रेजी विभाग की प्रो. शुभी भसीन की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

संगोष्ठी में प्रो. डॉ. इंदु वर्मा, डॉ. श्रद्धा श्री यादव, डॉ. शुभी भसीन, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. प्रीति वर्मा, डॉ. शालू गुप्ता, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. उमा सिंह गौर, डॉ. निशा साहू, डॉ. शिल्पी शर्मा, डॉ. सोनी मौर्य सहित कई अधिकारी, एनएसएस एवं एनसीसी प्रतिनिधि तथा महाविद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे।


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