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बदायूँ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं से किसानों को मिल रही सिंचाई की सुविधा

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बदायूँ, 08 दिसंबर।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों की भलाई और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश में कई योजनाएँ संचालित की हैं। किसानों को फसल सिंचाई के लिए नहर, तालाब, राजकीय नलकूप और बाँध-बन्धियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त निजी नलकूप लगाने पर भी सरकार अनुदान देती है।

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को उथले, मध्यम और गहरे नलकूप बनाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनें और कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़े।

योजना के तहत किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है और आवश्यक दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी की नकल, 61ख की नकल, इंजन क्रय कोटेशन व बिल, पासपोर्ट साइज फोटो, निवास/जाति प्रमाण पत्र, ग्राम सभा प्रस्ताव की नकल, आधार व बैंक पासबुक की छायाप्रति प्रस्तुत करनी होती है। बोरिंग का कार्य सरकारी चयनित एजेंसियों द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण के साथ कराया जाता है।

उथले नलकूप:
उथले नलकूप 30 मीटर तक गहराई वाले होते हैं। सामान्य श्रेणी के लघु कृषकों को 33,800 रु., सीमांत कृषकों को 45,400 रु., और अनुसूचित जाति/जनजाति के लघु एवं सीमांत कृषकों को 57,000 रु. अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2024-25 से सितम्बर 2025 तक 3,83,116 से अधिक उथले नलकूप बनाकर किसानों को लाभान्वित किया गया।

मध्यम और गहरे नलकूप:
31 से 60 मीटर गहराई वाले मध्यम नलकूपों के लिए लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जिसमें बोरिंग, पम्पसेट, पाइप एवं पम्प हाउस शामिल हैं। कुल अनुदान 2,57,000 रु. तक पहुँचता है, जिससे प्रति नलकूप 10 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता उपलब्ध होती है। इसी अवधि में 8,740 से अधिक मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण किया गया।

गहरे नलकूप:
61 से 90 मीटर गहराई वाले क्षेत्रों में भारी बोरिंग मशीनों द्वारा नलकूप बनाए जाते हैं। इसमें सभी श्रेणी के कृषक पात्र हैं। इस योजना के तहत कुल 3,47,000 रु. अनुदान मिलता है, जिसमें बोरिंग, जल वितरण प्रणाली और ऊर्जा अनुदान शामिल हैं। प्रत्येक नलकूप से 12 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता उत्पन्न होती है। वर्ष 2024-25 से सितम्बर 2025 तक 3,935 से अधिक गहरे नलकूप बनाए गए हैं।

इस प्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं से प्रदेश के हजारों छोटे और सीमांत किसान आत्मनिर्भर बनकर अपनी फसलों की सिंचाई क्षमता बढ़ा रहे हैं।

संवाददाता: गोविंद देवल


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