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यज्ञ तीर्थ गुधनी में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग, आचार्य संजीव रूप ने अथर्ववेद मंत्रों की व्याख्या की

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संवाददाता गोविन्द देवल
बिल्सी।
तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज द्वारा साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने विधिवत यज्ञ संपन्न कराया।
सत्संग के दौरान आचार्य संजीव रूप ने अथर्ववेद के मंत्रों की व्याख्या करते हुए कहा कि निर्धनता एक अभिशाप है और इसका मूल कारण आलस्य व अकर्मण्यता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को इंद्र की भांति पुरुषार्थ करते हुए कठोर परिश्रम से धन अर्जित करना चाहिए, क्योंकि निर्धनता भक्ति के द्वार भी बंद कर देती है। उन्होंने कहा कि भूखे व्यक्ति से भजन नहीं होता।
आचार्य ने कहा कि परोपकार भी तभी संभव है जब व्यक्ति के पास धन हो, लेकिन धन सदैव पुरुषार्थ से आना चाहिए, पाप के मार्ग से अर्जित धन समाज के लिए घातक होता है। उन्होंने कहा कि भगवान की इच्छा है कि यदि मनुष्य के पास धन आए तो उसे अच्छे कार्यों में खर्च करे। दुखी और जरूरतमंद लोगों की सहायता, शिक्षा, सदाचार और राष्ट्रहित के कार्यों में धन खर्च करने से व्यक्ति महान बनता है।
सत्संग में प्रश्रय आर्य, महेंद्र आर्य, कमलेश रानी, श्रीमती रेखा रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती सरोज देवी, कुमारी तानिया, कौशिकी रानी, पंजाब सिंह, बद्री प्रसाद आर्य, राकेश आर्य सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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