बिल्सी।
यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज के तत्वावधान में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में अथर्ववेद के मंत्रों के उच्चारण के साथ विधिवत आहुतियां दी गईं।
सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि सत्संग का वास्तविक अर्थ सद्गुणों और सत्य का संग है। ज्ञानपूर्वक कर्म करना और उसके माध्यम से सुख, शांति व आनंद प्राप्त करना ही सत्संग है। उन्होंने कहा कि केवल गीत गा लेना, ढोल-मंजीरा बजा लेना या कुछ धार्मिक अनुष्ठान कर लेना ही सत्संग नहीं होता। जो कर्म, व्यवहार और ज्ञान हमारे जीवन को पवित्र बनाता है, वही सच्चा सत्संग है।
इस अवसर पर आचार्य तृप्ति आर्य ने भावपूर्ण भजन “आनंद सोत बह रहा पर तू उदास है, अचरज है जल में रहकर भी मछली को प्यास है…” प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भजन के माध्यम से उन्होंने ईश्वर की सर्वव्यापकता और आत्मज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।
सत्संग में राकेश आर्य, पंजाब सिंह, विचित्रपाल सिंह, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती सरोज देवी, श्रीमती कमलेश देवी, कौशिकी आर्य, तान्या आर्य सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन यज्ञ, शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ किया गया।
Budaun Amarprabhat