संवाददाता: गोविंद देवल
बदायूं। शहर के खेड़ा नवादा सागरताल रोड स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मज़ाक मियां साहब पर 198वां सालाना उर्स मुबारक और 68वीं सालाना नियाज़ अकीदत व एहतराम के साथ मनाई गई। यह उर्स हजरत मौलवी सैय्यद शाह अब्दुल अली नक़वी रहमतुल्लाह अलैह का तथा नियाज़ हजरत ख्वाजा सैय्यद शाह मोहम्मद ईसार अली अल मारूफ मौलवी मियां साहब की याद में 24 शाबान को आयोजित की गई।
महफिल का आगाज़ अल्लाह की हम्द-ओ-सना और नात-ए-पाक से हुआ। इसके बाद मीलाद शरीफ की महफिल सजी, जिसमें नातख्वानों ने रूहानी कलाम पेश कर अकीदतमंदों को झूमने पर मजबूर कर दिया। दूरदराज से आए क़व्वालों की टोली ने सूफियाना कलाम पेश कर समा बांध दिया। क़व्वाली के दौरान अकीदतमंद मस्ती में झूम उठे और क़व्वालों पर नोटों की बारिश की।
नियाज़ की रस्म अदायगी दरगाह के सज्जादा नशीन हजरत ख्वाजा सैय्यद शाह मोहम्मद इख्तियार अली उर्फ चांद मियां साहब और हजरत ख्वाजा सैय्यद शाह मोहम्मद आसार अली उर्फ अली मियां साहब की सरपरस्ती में अदा की गई। इस दौरान मुल्क की सलामती, अमन और खुशहाली के लिए दुआएं की गईं।
उर्स के मौके पर अकीदतमंदों ने मजार-ए-मुबारक पर गुलपोशी और चादरपोशी कर दुआएं व मन्नतें मांगीं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती है, यही वजह है कि हर मजहब और तबके के लोग दरगाह पर हाजिरी देने पहुंचते हैं।
नियाज़ के बाद लंगर शरीफ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने तबर्रुक हासिल किया। दरगाह के पीरजादा हजरत सैय्यद मोहम्मद इजहार अली शाह अल मज़ाकी बदायूंनी व हजरत सैय्यद मोहम्मद फ़ज़ले अली शाह अल मज़ाकी ने भी अकीदतमंदों को दुआओं से नवाजा।
इस अवसर पर एमपी के गुलाम मुस्तफा, अली अशफाक, राजस्थान के सरफराज, गुलाम अली, अफजल अजीज खान, सैय्यद ताहिर, सैय्यद दीदार अली, इकरार अली, पप्पू भाई, सैय्यद दियार, अरसलान अफजल, अब्दुल शाहनवाज खान, मो. इकरार अली, सैय्यद दरबार अली सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat