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नशा करने वाले की समाज में इज्जत नहीं होती : आचार्य संजीव रूप*

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बिल्सी , तहसील क्षेत्र के योग्य तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस और ग्राम वासियों कोनशा करने के दुष्परिणाम बताते .हुए कहा ” ढाई इंच की बीड़ी है यही मौत की सीढ़ी है , गिलासों में जो डूबे फिर ना उभरे जिंदगानी में , हजारों बह गए इन बोतलों के बंद पानी में ! उन्होंने कहा कि जो भी युवा नशे की लत में पढ़ रहे हैं वह भगवान के दिए हुआ सुंदर मनुष्य शरीर को नष्ट कर रहे हैं । आचार्य संजीव रूप ने कहा “नशा नाश की जड़ है । नशा केवल शरीर को नष्ट नहीं करता बल्कि हमारे परिवार समाज को भी बर्बाद करता है ! नशा करने वाले की परिवार में और समाज में कोई इज्जत नहीं होती इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नशे से दूर रहना चाहिए अगर नशा करना है तो परोपकार का करो ‘ नशा करना है तो ईश्वर भक्ति का करो , नशा करना है तो राष्ट्र की सेवा का करो , जैसा की मीराबाई ने किया था अशफ़ाक उल्ला राम प्रसाद बिस्मिल ने किया था . महर्षि दयानंद ने किया था ! आचार्य संजय ग्रुप ने कहा कि यदि शराब और बीड़ी सिगरेट पीने में व्यक्ति ₹100 भी प्रतिदिन खर्च करता है तो इसे ₹3000 और साल में 36000 रुपए खर्च होते हैं यदि ₹36000 का व्यापार किया जाए तो लाखों रुपए व्यक्ति जोड़ सकता है । इस अवसर पर श्रीमती संतोष कुमारी , सुखबीर सिंह , बद्री प्रसाद आर्य , श्रीमती कमलेश रानी , श्रीमती सरोज देवी राकेश आर्यआदि मौजूद रहे


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