संवाददाता गोविन्द देवल
बदायूं, अमर प्रभात। शहर के मोहल्ला सोथा स्थित फरशोरी मंजिल में बज़्मे-अहबाब के तत्वावधान में “एक शाम-शोहदा-ए-कर्बला के नाम” कार्यक्रम के अंतर्गत गैर-तरही मनकबत मुशायरे का आयोजन किया गया। मुहर्रम के अवसर पर आयोजित इस अदबी महफिल में शायरों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अनवर आलम ने कहा कि मुशायरे सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने के साथ हमारी तहजीब और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश सत्य, न्याय, त्याग और अन्याय के विरोध की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंजीनियर वारिस रफी मौजूद रहे, जबकि संचालन अरशद रसूल ने किया।
महफिल की शुरुआत अल्हाज आज़म फरशोरी ने नात पेश कर की। इसके बाद सुरेंद्र नाज़, डॉ. एहसान रजा बदायूनी, इंजीनियर वारिस रफी, सादिक अलापुरी, शम्स मुजाहिदी बदायूनी, डॉ. इक्तिदार इमाम, अरशद रसूल और समर बदायूनी ने कर्बला की शहादत, त्याग और इंसानियत के संदेश पर आधारित मनकबत और कलाम पेश किए, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के समापन पर देश में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की गई। अंत में संयोजक आज़म फरशोरी ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
Budaun Amarprabhat