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अंतर्राष्ट्रीय पटल पर छाए टीएमयू एग्रीकल्चर के स्टुडेंट्स

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कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस के 23 स्टुडेंट्स को जर्मनी प्रशिक्षण प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर, पहली जून को होंगे जर्मनी रवाना

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी- मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस के 23 स्टुडेंट्स को जर्मनी प्रशिक्षण प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर मिला है। हॉर्टिकल्चर वर्क प्रोग्राम एट जर्मनी के तहत छात्र जर्मनी देशों के होफ रोहरकास्टेन और एर्डबीरहोफ़ ओस्टरलोह फार्मस में जाएंगे। तीन महीने के लिए जर्मनी जा रहे हर स्टुडेंट को 02 लाख प्रति माह वेतन मिलेगा। वहां वे आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत अनुसंधान विधियों और स्थायी खेती के सिस्टम के बारे में सीखेंगे। इससे न केवल उनकी शैक्षिक योग्यता में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में भी मदद मिलेगी। वहां वे विभिन्न कृषि परियोजनाओं में भाग लेंगे। उन्नत प्रयोगशालाओं में कार्य करेंगे और विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। इन छात्रों का चयन एक कठोर प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जिसमें उनके शैक्षिक प्रदर्शन, लिखित परीक्षा, मौखिक परीक्षा और समग्र विकास को ध्यान में रखा गया। कृषि कॉलेज के ये छात्र आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं, जिसमें 19 छात्र और 4 छात्राएं हैं। ये स्टुडेंट्स थ्री मंथ वर्क वीजा पर पहली जून को जर्मनी रवाना हो जाएंगे। उल्लेखनीय है, 2022 में टीएमयू एग्रीकल्चर कॉलेज के दो स्टुडेंट्स- वैभव कुमार और उमेश सैनी 18-18 लाख के पैकेज पर डेढ़ साल की इंटर्नशिप पर डेनमार्क जा चुके हैं।
चयनित होने वाले स्टुडेंट्स में तेलंगाना से दुलाम अरुण कुमार, नवनीत धरशनाला, मोनिका बीधनी, निरंजन रेड्डी गुदुरु, शिव कृष्णा बोल्ला, मडिपल्ली राजू, पटलोला प्रनीथ रेड्डी, रेड्डीमाशु धीरज, बट्टू अरुण कुमार, जे भवदेश वर्मा, स्वामी भानावत, आंध्र प्रदेश से वेंकट फनींद्र रेड्डी माचुपल्ले, मनुषा रेड्डी रामीरेड्डी, सैयद गौस अज़म, शेख़ असीफ हुसैन, वेंकट श्रवंती मलेपाटि, लक्ष्मी प्रत्यूषा बुट्टी, कोल्ली पालडिंकर. उत्तर प्रदेश से अंश यादव, अभिषेक, ऋतिक कुमार सिंह, आर्यमान सिंह और बिहार से ऋषभ राज है। 2014 में स्थापित तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस को 2021 में आईसीएआर से मान्यता मिली है। एग्रीकल्चर कॉलेज में स्नातक, स्नातकोत्तर के संग-संग रिसर्च भी कराई जाती है। कॉलेज की सभी फैकल्टी पीएचडी और नेट क्वालीफाई हैं।
टीएमयू एग्रीकल्चर की इस बड़ी उपलब्धि से गदगद टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन कहते हैं, विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त करने से हमारे छात्रों के तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान में अद्वितीय बढ़ोतरी होगी। यह उन्हें वैश्विक कृषि उद्योग में प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उन्होंने अपने आशीर्वचन में कहा, आप जर्मनी वर्क वीजा पर जा रहे हैं। अपना शत प्रतिशत आउटपुट देने का प्रयास करें। साथ ही नौकरियां भी तलाशें। अभिभावक के नाते उन्होंने इन चयनित छात्रों से आवासीय बंदोबस्त से लेकर फूडिंग की बाबत भी पूछा। जीवीसी श्री मनीष जैन और एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन और मेंबर ऑफ गवर्निंग बॉडी सुश्री नंदिनी जैन कहते हैं, जर्मनी के लिए यह चयन यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह अपने छात्रों को सर्वश्रेष्ठ शैक्षिक और प्रैक्टिकली अनुभव प्रदान करने के लिए संकल्पित और समर्पित है। टीएमयू वीसी प्रो. वीके जैन कहते हैं, हम चाहते हैं कि हमारे छात्र वैश्विक स्तर पर कृषि के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास से अवगत हों और उन तकनीकों को अपनाएं, जो पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ हैं। डीन स्टुडेंट्स वेलफेयर एंड चीफ प्रॉक्टर प्रो. एमपी सिंह ने जर्मनी जा रहे इन स्टुडेंट्स को मोटिवेट किया। कॉलेज के डीन डॉ. पीके जैन ने बताया, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को वैश्विक आधुनिक कृषि का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना है। दूसरी ओर जर्मनी के लिए चयनित ये स्टुडेंट्स मानते हैं, हमारे लिए एक अनूठा अवसर है। हम जर्मनी में आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखकर भारत में कृषि को और उन्नत बना सकते हैं।


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