राज्य सूचना आयुक्त का ऐतिहासिक निर्णय
लखनऊ। राज्य सूचना आयोग में राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया जिसमें जनहित गारंटी गारंटी अधिनियम-2011 की धारा-7 के तहत प्रदेश में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों पर की गई कार्यवाही का पूर्ण रिकार्ड रखा जाए जिससे पारदर्शिता बनी रहे। इस रिकार्ड से सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदनों में भी कमी आने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
आज अपने न्यायालय में प्रस्तुत कुसुम सिंह की एक अपील जिसमें राजस्व विभाग से यह जानकारी चाही गयी थी कि उनके विभाग में कितने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उ.प्र. सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा में जनता के जनहित गारंटी अधिनियम-2011 की धारा-7 के तहत दण्ड की कार्यवाही की गयी है। इसके जबाव में राजस्व विभाग के समीक्षा अधिकारी पवन कुमार द्विवेदी ने न्यायालय को बताया कि यह कार्यवाही जिलाधिकारी स्तर से होनी थी इसलिए आवेदन जिलाधिकारी चित्रकूट को स्थानांतरित कर दिया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की सूचना प्रशासन स्तर पर वह धारित नहीं करते हैं।
इस पर सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने अपने आदेश में कहा कि आयोग आवश्यक समझता है कि अपीलार्थी के इन बिन्दुओं पर सभी जिलों से सूचना एकत्रित करे और समेकित कर अपीलार्थिनी को 19 सितम्बर 2025 का आवश्यक रूप से उपलब्ध कराये। साथ ही राजस्व विभाग को यह भी निर्देशित किया गया कि भविष्य में सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-4 के प्रावधान को दृष्टिगत रखते हुए उ.प्र. जनहित गारंटी अधिनियम-2011 के अंतर्गत सभी जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों पर की गई कार्यवाही का रिकार्ड भी रखे ताकि जनहित के अनुरूप व पारदर्शिता लाने में सहायता प्राप्त हो सके। इस कार्य से सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदनों में भी कमी आने की संभावना बनेगी।
Budaun Amarprabhat