गज पर मां दुर्गा का आगमन होगा शुभिता का प्रतीक: ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा
शारदीय नवरात्र का प्रारंभ 22 सितंबर से
विश्व को समृद्धि की ओर अग्रेषित करेगी नवरात्र
विश्व में स्थिरता प्रदान करने में सहायक बनेंगे योग
दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को
महानवमी 1 अक्टूबर को
विजयादशमी 2 अक्टूबर को
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। नवरात्रि में दिन के अनुसार माता की सवारी होती है और इसका असर भी देश-दुनिया पर उसी सवारी के अनुसार ही पड़ता है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा से कि शारदीय नवरात्रि में माता की सवारी क्या होगी और इसका प्रभाव क्या हो सकता है?
शारदीय नवरात्रि में माता की सवारी
माता की अलग-अलग सवारियों में पालकी, घोड़ा, हाथी, नाव आदि शामिल हैं। जब भी नवरात्रि की शुरुआत सोमवार या रविवार से होती है तो माता की सवारी हाथी (गज) को माना जाता है। 22 सितंबर के दिन शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है और इस दिन सोमवार है। इसलिए माता इस बार हाथी पर सवार होकर ही आएंगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गज को माता की शुभ सवारियों में से एक माना जाता है।
देश-दुनिया पर प्रभाव
माता का हाथी पर सवार होकर आना देश-दुनिया के लिए सकारात्मक साबित होगा। इस दौरान अच्छे परिवर्तन वैश्विक स्तर पर दिख सकते हैं।
हाथी पर सवार होकर माता कृषि क्षेत्र में शुभता लाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार में तेजी देखने को मिल सकती है।
मजदूर वर्ग के लोगों के लिए भी समय अच्छा रहेगा।
हाथी पर माता का सवार होकर आना लोगों के जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
सामाजिक मेलजोल भी इस दौरान बढ़ सकता है।
कुछ राजनीतिक मुद्दों के सुलझने से देश-दुनिया में स्थिरता की स्थिति बन सकती है।
घट स्थापना शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 21 सितंबर को रात्रि 1:26 पर प्रारंभ होगी, जो 22 सितंबर को रात्रि 2:57 पर समाप्त होगी। ऐसे में शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से प्रारंभ होंगी।
शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक कलश का शुभ मुहूर्त सुबह 06:07 से आरंभ होकर सुबह 08:08 बजे तक रहेगा।
वहीं इसके अलावा अभिजित मुहूर्त 11:42 से दोपहर 12:30 तक रहेगा। इन दोनों मुहूर्तों में आप कलश स्थापना कर सकते हैं।
कब होगी दुर्गा अष्टमी और नवमी
दुर्गा अष्टमी इस बार 30 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन कन्या पूजन किया जाएगा।
अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को सायं 4:34 से होगी, और समापन 30 सितंबर को 6:07 पर होगा अतः दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को मनाई जाएगी।
इसी प्रकार महानवमी का प्रारंभ 30 सितंबर को सायं 6:08 पर होगा और समापन रात्रि 7:02 पर इसलिए महानवमी 1 अक्टूबर को सर्वमान्य होगी।
इसी दिन विधिपूर्वक कन्या पूजन किया जाएगा।
राजेश कुमार शर्मा
ज्योतिषाचार्य
Budaun Amarprabhat