तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में लीडरशिप बियोंड यूनिफार्मः लेसंस फ्रॉम द आर्म्ड फोर्सज़ फॉर प्रोफेशनल एक्सीलेंस पर लीडरशिप टाक सीरीज़ का 16वां सत्र, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत ने टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन से की शिष्टाचार भेंट

मुरादाबाद। भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवम् विशिष्ट विचारक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने कहा, नेतृत्व केवल पद नहीं, बल्कि चरित्र, सहानुभूति और दृष्टिकोण से जन्म लेने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने सैन्य जीवन से जुड़ी अनेक प्रेरक घटनाए साझा करते हुए बताया, संकट की घड़ी में लिए गए निर्णय ही असली नेतृत्व की परीक्षा होते हैं। उन्होंने अनुशासन और सत्यनिष्ठा, अनुकूलनशीलता और निर्णय क्षमता, टीमवर्क और विश्वास, मानसिक दृढ़ता और सेवा सर्वाेपरि को नेतृत्व के पांच प्रमुख सूत्र बताए। लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत ने कहा, नेतृत्व का आधार नैतिक साहस और आत्म नियंत्रण है। बदलते हालातों में शीघ्र और विवेकपूर्ण निर्णय लेना सफलता की कुंजी है। कमांड एंड कम्पैशन की भावना से ही टीम मजबूत बनती है। सबसे बड़ी लड़ाइयां अक्सर मन के भीतर लड़ी जाती हैं। सच्चा नेता हमेशा दूसरों की भलाई को अपने हित से ऊपर रखता है। ले. जनरल चतुर्वेदी तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की ओर से लीडरशिप बियोंड यूनिफार्मः लेसंस फ्रॉम द आर्म्ड फोर्सज़ फॉर प्रोफेशनल एक्सीलेंस पर लीडरशिप टाक सीरीज़ के 16वें सेशन में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इससे पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, एसोसिएट डीन एकेडमिक्स प्रो. अमित कंसल, फार्मेसी के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके टॉक सीरीज़ का ऑडी में शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता को बुके देकर स्वागत और पोट्रेट देकर सम्मानित किया गया। टाक सीरीज के दौरान स्टुडेंट्स ने मुख्य वक्ता से सवाल करके अपनी जिज्ञासा को व्यक्त किया। अंत में लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत ने टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन से शिष्टाचार भेंट भी की।

लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने कारगिल युद्ध का जिक्र करते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज पांडे के अदम्य साहस और बलिदान का भावपूर्ण स्मरण करते हुए स्टुडेंट्स को देश भक्ति की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। उन्होंने सैन्य नेतृत्व के सिद्धांतों को पेशेवर जीवन में सफलता के सूत्रों से जोड़ते हुए कहा, देश भक्ति से बढ़कर कोई भक्ति नहीं है। देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है और देश प्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं है। उल्लेखीनय है, लेफ्टिनेंट जनरल श्री विष्णु कांत ने भारतीय सेना में चार दशकों से अधिक सेवाओं में नीति निर्माण, मानव संसाधन प्रबंधन और संगठनात्मक सुधारों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बतौर डिफेंस बैंकिंग एक करोड़ से अधिक सैनिकों के लिए वित्तीय सेवाओं में सुधार हेतु महत्वपूर्ण नवाचार किए हैं। टॉक सीरीज में डीन स्टुडेंट वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह, एसोसिएट डीन रिसर्च डॉ. ज्योति पुरी, एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन, चीफ लाइब्रेरियन डॉ. विनीता जैन के संग-संग डेंटल, फिजियोथेरेपी, एजुकेशन और फार्मेसी कॉलेजों के स्टुडेंट्स मौजूद रहे। संचालन असिस्टेंट डायरेक्टर अकेडमिक्स डॉ. नेहा आनन्द ने किया।
Budaun Amarprabhat