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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति से उत्तर प्रदेश में तेजी से स्थापित हो रहीं प्रसंस्करण इकाइयाँ

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बदायूं, 13 नवम्बर।
उत्तर प्रदेश अपनी भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं के साथ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की दो-तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर है। प्रदेश सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 से राज्य में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने उद्यमियों को कई प्रकार की रियायतें और सुविधाएँ देकर औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन दिया है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कृषि और उद्योग के बीच एक मजबूत कड़ी है। इसके अंतर्गत अनाज, फल, सब्जियाँ, दूध, कोको, गन्ना आदि उत्पादों को प्रसंस्कृत कर उपभोक्ताओं तक उपयोगी रूप में पहुँचाया जाता है — जैसे आटा, बिस्कुट, नूडल्स, जेली, मुरब्बा, पनीर, मिठाई, आइसक्रीम, गुड़, चीनी, चिप्स आदि।

नीति की प्रमुख विशेषताएँ :

भूमि संबंधी रियायतें: खाद्य प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने के लिए 12.5 एकड़ से अधिक भूमि खरीदने की अनुमति, गैर-कृषि उपयोग शुल्क में छूट, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क पर 50% छूट और बाहरी विकास शुल्क पर 75% की छूट दी गई है।

स्टांप शुल्क व कर रियायतें: परियोजना स्थल पर सरकारी भूमि के विनिमय में देय मूल्य का 25% जमा करने पर छूट तथा स्टांप शुल्क में भी राहत दी गई है।

मंडी शुल्क से छूट: प्रसंस्करण हेतु राज्य के बाहर से लाई गई कृषि उपज और सीधे प्रसंस्करण इकाइयों को बेचे गए उत्पादों पर मंडी शुल्क व उपकर से पूर्ण छूट प्रदान की गई है।

ऊर्जा व परिवहन प्रोत्साहन: बिजली आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर सब्सिडी और निर्यात हेतु परिवहन सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है।

पूंजीगत सब्सिडी: नई इकाइयों के लिए संयंत्र, मशीनरी और सिविल कार्य पर किए गए व्यय का 35% पूंजीगत सब्सिडी (अधिकतम ₹5 करोड़ तक) दी जा रही है। विस्तार या आधुनिकीकरण के लिए ₹1 करोड़ तक की पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध है।

कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स: मूल्यवर्धन और फसल उपरांत हानि को कम करने हेतु कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया है। रीफर वाहन और मोबाइल प्री-कूलिंग वैन की खरीद पर ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक जिले में विभिन्न उत्पादों की एक हजार खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएँ, जिससे किसानों को मूल्य संवर्धन का लाभ और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 65 हजार से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ कार्यरत हैं, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिला है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 तक 78,981 इकाइयों के उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से सितम्बर 2025 तक 19,104 इकाइयों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
राज्य में अब तक 15 से अधिक एग्रो व फूड प्रोसेसिंग पार्क विकसित किए जा चुके हैं।

सरकार की इस नीति का उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकी, विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण, भंडारण तथा कृषि आधारित औद्योगिक विकास को गति देना है। इस नीति से उत्तर प्रदेश देश में खाद्य प्रसंस्करण का प्रमुख हब बनकर उभर रहा है।


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