संवाददाता: आई एम खान
बिसौली। मुक़द्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया है, जिसे मगफिरत (गुनाहों की माफी) का अशरा कहा जाता है। इस दौरान रोजेदार अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी के लिए खास तौर पर दुआएं करते हैं और इबादत में ज्यादा समय बिताते हैं।
नगर की मस्जिद के इमाम मौलाना अफलाक रजा उवैसी ने बताया कि रमजान का पूरा महीना रहमतों और बरकतों से भरा होता है, लेकिन इसे तीन अशरों में तकसीम किया गया है। पहला अशरा रहमत का होता है, जिसमें अल्लाह की खास रहमत नाजिल होती है, जबकि दूसरा अशरा मगफिरत का होता है। यह अशरा रमजान के 20वें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से अपनी मगफिरत, अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और पूरी उम्मत के लिए दुआएं मांगते हैं। यह समय इंसान के लिए अपने गुनाहों से तौबा करने और अपनी गलतियों की माफी मांगने का बेहतरीन मौका होता है।
मौलाना अफलाक रजा उवैसी ने कहा कि रमजान के महीने में गरीब और जरूरतमंदों की मदद करना भी बहुत बड़ी नेकी है। उन्होंने मोमिनों से अपील की कि इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें और तौबा-इस्तिगफार कर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें।
Budaun Amarprabhat