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होली मिलन समारोह में सजा भव्य कवि सम्मेलन, हास्य व वीर रस की कविताओं ने बांधा समां

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बिसौली। श्री अग्रवाल सभा द्वारा होली मिलन समारोह के अवसर पर भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने हास्य, वीर और श्रृंगार रस की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अग्रवाल सभा के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने महाराज अग्रसेन के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद सोहेल अग्रवाल ने सरस्वती वंदना “हे शारदे मां” प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
कवि सतीश चंद्र शर्मा ‘सुधांशु’ ने हास्य अंदाज में पढ़ा— “हाय तौबा फिजूल होली में, हो ही जाती है भूल होली में।” वहीं प्रवीन अग्रवाल ‘नादान’ ने आधुनिक दौर की होली पर कटाक्ष करते हुए कहा— “ना किसी से मिलना जुलना, ना कोई हंसी ठिठोली, मोबाइल में सिमट गई है आज के दौर की होली।”
कवि विजय सक्सेना ‘विजय’ ने कहा— “रंगों में रंगना मगर रखना दिल को साफ, संभव हो तो कीजिए भूल चूक सब माफ।” हरगोविंद पाठक ‘दीन’ ने अपनी रचना में कहा— “द्वेष मिटाने की ऋतु है होली, प्रेम सा कोई धर्म नहीं है।”
इसके अलावा साक्षी शर्मा और निशांत गोयल ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। रंगों और कविताओं के इस सुंदर संगम ने होली पर्व की खुशियों को और भी खास बना दिया


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