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आयुष्मान भारत का ग्राम स्तरीय सर्वे के लिए गांवों में पहुंचे एमए राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी*

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*बदायूँ*। शासन की महत्वाकांक्षी *आयुष्मान भारत – PMJAY योजना* धरातल पर कितनी कारगर है, इसका हकीकत जानने के लिए राजकीय महाविद्यालय आवास विकास बदायूँ के *एमए द्वितीय सेमेस्टर राजनीति विज्ञान* के छात्र-छात्राएं अलग-अलग ग्रामों में जाकर लाभार्थियों का सर्वेक्षण कर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार जायसवाल के निर्देशन में चल रहे इस _फील्ड वर्क प्रोजेक्ट_ का उद्देश्य योजना की पहुंच, कार्ड निर्माण की स्थिति और इलाज में आने वाली दिक्कतों का वास्तविक आकलन करना है।
छात्र-छात्राओं की टीम जगत, म्याऊं , कादरचौक, उसैहत, उझानी , दातागंज क्षेत्र के गांवों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही है। प्रत्येक लाभार्थी परिवार से मुखिया का नाम, जाति, कार्ड की स्थिति, इलाज का अनुभव और हॉस्पिटल में पैसे मांगने जैसी शिकायतों पर डेटा एकत्र किया जा रहा है।
*एमए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा नन्दिनी शंखधार* ने बताया, “हमने गांव दारानगर
पोस्ट जगत में 40 परिवारों का सर्वे किया। 70% लोगों के कार्ड बने हैं, पर सिर्फ 25% ने ही हॉस्पिटल में कार्ड इस्तेमाल किया। कई लोग अभी भी समझते हैं कि इलाज मुफ्त नहीं है।”
*छात्र अंकित बाबू* ने कहा, “फील्ड में पता चला कि CSC केंद्र और आशा दीदियों की भूमिका सबसे अहम है।”
पूरे सर्वे को पेपरलेस बनाने के लिए छात्रों ने गूगल फॉर्म तैयार किया है। मोबाइल से फॉर्म भरते ही डेटा सीधे एक्सेल शीट में चला जाता है। इससे _जाति-वार कवरेज, कार्ड बनाम उपयोग, शिकायतें_ का विश्लेषण तुरंत हो जाएगा। महाविद्यालय प्रशासन इस रिपोर्ट को जिला प्रशासन को सौंपेगा।

प्रभारी डॉ. राकेश कुमार जायसवाल ने बताया, “ये सिर्फ नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत निर्धारित पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रोजेक्ट नहीं है अपितु इस फील्ड वर्क के द्वारा विद्यार्थी लोकतंत्र और शासन की जन नीतियों का जमीनी समझ विकसित कर रहे हैं।

*आंकड़े क्या कहेंगे?*
सर्वे पूरा होने के बाद छात्रों द्वारा _Pivot Table और ग्राफ_ के जरिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि:
1. कितने % पात्र परिवारों के कार्ड बने
2. कार्डधारकों में कितनों ने इलाज कराया
3. हॉस्पिटल में पैसे मांगने की शिकायतें कितनी
4. योजना को बेहतर बनाने के लिए ग्रामीणों के सुझाव

राजनीति विज्ञान विभाग के इस _‘ग्रासरूट सर्वे’_ से उम्मीद है कि आयुष्मान भारत की कमियों को दूर करने में प्रशासन को मदद मिलेगी।


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