बदायूं। हर वर्ष 30 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस (एस्टेरॉयड डे) का उद्देश्य लोगों को क्षुद्रग्रहों के वैज्ञानिक महत्व, पृथ्वी के लिए संभावित खतरों और ग्रह सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक करना है। यह जानकारी खगोलविद अमर पाल सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 में 30 जून को अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस घोषित किया था। यह दिवस 30 जून 1908 को रूस के साइबेरिया में हुई तुंगुस्का घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जब एक विशाल अंतरिक्षीय पिंड के वायुमंडल में विस्फोट से लगभग दो हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जंगल प्रभावित हुआ था।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि क्षुद्रग्रह सौरमंडल के निर्माण के समय बची हुई चट्टानी और धात्विक सामग्री के अवशेष हैं। अधिकांश क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी में पाए जाते हैं, जबकि कुछ पृथ्वी की कक्षा के निकट भी घूमते हैं, जिन पर वैज्ञानिक लगातार निगरानी रखते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी क्षुद्रग्रह पृथ्वी के लिए खतरा नहीं होते। नासा समेत दुनिया की कई अंतरिक्ष एजेंसियां आधुनिक दूरबीनों और तकनीकों की मदद से इनके आकार, गति और कक्षा पर लगातार नजर रखती हैं। उन्होंने बताया कि नासा का DART मिशन संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों से पृथ्वी की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है।
अमर पाल सिंह ने कहा कि आज नागरिक वैज्ञानिक भी विभिन्न वैज्ञानिक अभियानों के माध्यम से क्षुद्रग्रहों की खोज और अध्ययन में भागीदारी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में 27 जून 2026 को 1997 NC1 नामक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के पास से सुरक्षित दूरी से गुजरा था, जिससे किसी प्रकार का खतरा नहीं था।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस हमें यह संदेश देता है कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का माध्यम नहीं है, बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा और मानवता के भविष्य की तैयारी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Budaun Amarprabhat