संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के ग्राम रीठ (तहसील चंदौसी) निवासी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पुष्पेंद्र कुमार मौर्य ने मुरादाबाद स्थित आईएफटीएम विश्वविद्यालय से जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) विभाग में सफलतापूर्वक डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर एक नया इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि आईएफटीएम विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं, जिससे न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे संभल और मुरादाबाद क्षेत्र का गौरव बढ़ा है।
डॉ. पुष्पेंद्र कुमार मौर्य ने अपना यह संपूर्ण शोध कार्य विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. स्मिता ज्योति के कुशल निर्देशन में पूरा किया। उनके शोध का विषय कृषि में बहुतायत से प्रयुक्त होने वाले फफूंदनाशी डाइथेन एम-45 का मीठे पानी की प्रसिद्ध मछली रोहू पर पड़ने वाले विषाक्त प्रभावों एवं उनमें होने वाले जैव-रासायनिक परिवर्तनों का गहन अध्ययन करना था। पर्यावरणविदों और शिक्षाविदों का मानना है कि उनका यह शोध पर्यावरण संरक्षण, जलीय जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
डॉ. मौर्य की इस अकादमिक उपलब्धि के तहत उनके शोध-कार्य से जुड़े दो महत्वपूर्ण शोध-पत्र देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी इस बड़ी सफलता पर विश्वविद्यालय के कुलपति, समस्त प्राध्यापकों, शोधार्थियों और उनके शुभचिंतकों ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
अपनी इस सफलता का श्रेय डॉ. पुष्पेंद्र कुमार मौर्य ने अपनी शोध निर्देशिका, विश्वविद्यालय प्रशासन, अपने गुरुजनों, माता श्री श्रीमती राजेश कुमारी मौर्य तथा परिवार के सभी सदस्यों के अटूट सहयोग और आशीर्वाद को दिया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि भविष्य में वे शिक्षा, उच्च शोध और समाज सेवा के क्षेत्रों में पूरी निष्ठा के साथ निरंतर कार्य करते रहेंगे।
उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों तथा तमाम गणमान्य नागरिकों ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
Budaun Amarprabhat