ककराला। अदब की दुनिया के मशहूर उस्ताद शायर मरहूम रागिब ककरालवी की याद में एक भावपूर्ण मुशायरे का आयोजन किया गया। उनके इंतकाल के बाद गमगीन माहौल के बीच सजे इस मुशायरे में अकीदतमंद शायरों ने अपने कलाम के जरिए मरहूम उस्ताद को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की।
गौरतलब है कि अपने इंतकाल से महज दो दिन पहले रागिब साहब ने एक मिसरा—’उन्हीं ने अश्क बहाए सरे मजार बहुत’ दिया था। मुशायरे में पहुंचे सभी शोअरा ने इसी मिसरे पर तरही गजलें और अशआर पेश कर मरहूम के अदबी अंदाज और उनकी शख्सियत को शिद्दत से याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीगढ़ से तशरीफ लाए एएसएफ ग्रुप हेल्थकेयर के संस्थापक हकीम मौलाना अफरोज खान ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने रागिब ककरालवी की सादगी, बेबाकी, इल्मी गहराई और ककराला की अदबी रिवायत में उनके कद्दावर रुतबे को रेखांकित किया। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि रागिब साहब की याद में एक भव्य लाइब्रेरी स्थापित की जानी चाहिए, जिससे आने वाली नस्लें उनकी इल्मी विरासत से फैजयाब हो सकें। वहीं, रागिब साहब के साहबजादे मुअत्तर खान ने वालिद की जिंदगी से जुड़े कई संस्मरण साझा कर समां को बेहद संजीदा बना दिया।
मुशायरे में सोहराब ककरालवी ने पढ़ा:
“जिन्होंने मेरी कभी कद्र ही न की ‘सोहराब’ / उन्हीं के हिस्से में आया है मेरा प्यार बहुत।”
अरशद रसूल ने व्यवस्था और समाज पर तंज कसते हुए कहा:
“वो अपने हाल को बेहतर बना नहीं पाए / इसी में खुश हैं कि माजी था शानदार बहुत।”
चांद ककरालवी ने मरहूम के गम को बयां करते हुए पढ़ा:
“कई जनाजे इन हाथों से कर दिए रुखसत / मगर ये आपकी रेहलत है, सोगवार बहुत।”
कासगंज के शायर नसीरुद्दीन नसीर ने कलाम पेश किया:
“तसुव्वुरात में रागिब की कब्र है मेरे / चढ़ा रहा हूं अकीदत के लालाजार बहुत।”
इसके अलावा आबशार आदम, आगाज साकी, जाकिर अली खां जाकिर, अजमत अली खां और सोहराब हैदर ने भी अपने बेहतरीन कलाम से सामईन की आंखें नम कर दीं। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी तादाद में अदब प्रेमी उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat