उसहैत। मंदाकिनी साहित्य मंच उसावां के तत्वावधान में रविवार को क्षेत्र के ग्राम नवीगंज में ओज कवि आदेश प्रताप सिंह के आवास पर एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जनपद के विभिन्न अंचलों से पधारे कवियों और शायरों ने देशप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि महेश अग्निमुख ने की, जबकि कुशल संचालन स्वयं ओज कवि आदेश प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत रश्मिरति यादव द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुई। इसके उपरांत ओज कवि संतोष सिंह ने अपनी जोशीली कविताओं से पंडाल में नव-उत्साह का संचार किया।
शायर अब्दुल वहाब आज़ाद ने देशप्रेम से सराबोर नज़्म “भारत है मेरा नाम, मैं दुनिया से निराला” पढ़कर खूब तालियां बटोरीं। नंदकिशोर पाठक ने सामाजिक परिवेश पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा—”इस देश की पहचान थी इंसानियत की शान… ये है विकास की घड़ी या नाश आ रहा।” संचालक आदेश प्रताप सिंह ने सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हुए पढ़ा—”अब तो बहती सदा प्रेम गंगा रहे, धर्म मजहब में ना कोई दंगा रहे… अब मिटा दो सभी नफरती आंधियाँ, अब सभी के दिलों में तिरंगा रहे।”
इसके अतिरिक्त जगपाल जग, अमित अम्बर, मुशीर अहमद मुशीर, अनीश कल्ब और रामनरेश यादव ने भी उत्कृष्ट काव्य पाठ किया। कार्यक्रम के समापन पर धर्मा सेवा ट्रस्ट के संस्थापक व वरिष्ठ भाजपा नेता राणा प्रताप सिंह ने सभी रचनाकारों को सम्मानित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat