(उत्तम संयमके रूप में मनाया गया छठवा दिन)
बिल्सी:-नगर के मोहल्ला संख्या 8 स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा मनाए जा रहे दस लक्षण पर्व (पर्युषण पर्व)का छठवा दिन यहां उत्तम संयम धर्म के रुप में मनाया गया यहां सबसे पहले जिनेन्द्र भगवान का जलाभिषेक पूजा अर्चना एवं विधान का आयोजन किया गया । यहां जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी प्रशान्त जैन ने कहा सम्यक प्रकार से (सम) + यम अर्थात नियंत्रण करना वह संयम है। वह संयम जब आत्मा के आश्रय से होने वाले सम्यग्दर्शन के साथ होता है, तब ‘उत्तम संयम धर्म’ नाम पाता है।
साथ ही, पंचेन्द्रिय तथा मन के विषयों में आसक्ति को घटाना तथा इसके कारण पंचेन्द्रिय जीवों की रक्षा होना, वह व्यवहार से संयम कहलाता है।इसके बाद दोपहर को यहां सुगंध-दशमी का आयोजन किया गया जिसमें नीलम जैन द्वारा बताया गया कि सुगंध दशमी पर चंदन की खुशबू से जिनालय महक उठते है, इसलिए जिनालयों में धूप खेई जाती है श्रद्धालु अष्ट कर्म के नाश करने के लिए अग्नि पर धूप खेवते है ।
मान्यता है कि धूप के पवित्र वातावरण से भगवान खुश होकर मानव को मोक्ष का रास्ता दिखलाते हैं। इसी भावना के साथ सभी जैन मंदिरों में सुगंध दशमी पर धूप खेई जाती है।बताया कि सुगंध दशमी व्रत विशेष रूप से जैन महिलाएं हर वर्ष इस व्रत को करती हैं धूप दशमी व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के सारे अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। जैन साधर्मियों ने सुगंध दशमी व्रत कथा पढ़ने के साथ-साथ सभी जैन मंदिरों में 24 तीर्थंकरों, पुराने शास्त्रों तथा जिनवाणी के सम्मुख चंदन, लौंग की धूप अग्नि को अर्पित करके धूप खेवन पर्व मनाया।
इस मौके पर समाज के अध्यक्ष मृगांक कुमार जैन ,अनिल जिण सोनी ,प्रीत जैन उर्फ स्पर्श ,अनूप जैन जयप्रकाश जैन ,अभिषेक जैन शीला जैन ,इन्दु जैन ,ज्योति जैन, नीलम,मानसी जैन आदि लोग मौजूद रहे
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