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भाकियू (असली) का तहसील सदर में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ हल्ला बोल

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सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे, खाद की किल्लत और दाखिल-खारिज में रिश्वतखोरी को लेकर सौंपा गया ज्ञापन

बदायूं। भारतीय किसान यूनियन (असली गैर-राजनीतिक) द्वारा जनपद में व्याप्त भ्रष्टाचार और विभिन्न अनियमितताओं के विरोध में तहसील सदर बदायूं में एक जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस महापंचायत व प्रदर्शन की अध्यक्षता चौधरी भागमल यादव ने की, जबकि संचालन युवा जिला अध्यक्ष जसवीर यादव ने किया। किसानों ने प्रशासनिक उपेक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया और समस्याओं के त्वरित निस्तारण की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान जिला सचिव सूरजपाल सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि विकासखंड जगत के ग्राम फरीदापुर सानी में 18 अप्रैल 2026 को गांव के ही दबंग भू-माफिया बद्री प्रसाद (पुत्र हीरालाल) ने सार्वजनिक रास्ते पर पक्की दीवार खड़ी कर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके साथ ही राजपाल (पुत्र रामचंद्र) द्वारा वहां भुसा और बठिया लगा दी गई है।
इसकी लिखित शिकायत 18 अप्रैल 2026 को ही तहसीलदार सदर से की गई थी। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा लेखपाल को कई बार मौके पर भेजे जाने के बावजूद लेखपाल ज्ञानेंद्र कुमार माथुर ने अवैध कब्जा करने वालों से आर्थिक साठगांठ कर ली, जिसके चलते आज तक रास्ता बंद पड़ा है। किसानों ने मांग की कि तत्काल प्रभाव से यह रास्ता खुलवाया जाए और भू-माफियाओं से सरकारी जमीन मुक्त कराई जाए।
जिला सचिव ने आगे बताया कि बदायूं-उझानी रोड पर चंद्रका देवी इंटर कॉलेज से पहले सड़क किनारे सरकारी भूमि पर अवैध रूप से दुकानें तान ली गई हैं। इसकी शिकायत पूर्व में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता (प्रथम) से की गई थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं, अरुण शर्मा ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि बदायूं-बिसौली मार्ग पर एमआरएफ एजेंसी के पास बजरी, बजरपुर और रेत विक्रेताओं द्वारा सड़क पर ही सामग्री उतरवा दी जाती है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क तक रेत उतरने के कारण राहगीरों, चालकों और स्कूली बच्चों को भारी धूल और परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसानों ने इन दुकानदारों के खिलाफ भी शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
जिला अध्यक्ष केपीएस राठौड़ ने किसानों की प्रमुख समस्या उठाते हुए कहा कि बदायूं में इस समय किसानों को यूरिया और डीएपी खाद की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। प्राइवेट दुकानदार किसानों से ओवररेट वसूल रहे हैं और साथ में महंगे दरों पर अन्य उत्पाद (लगेज) खरीदने का दबाव बनाकर लूट रहे हैं। सहकारी समितियों पर भी एक्स्ट्रा लगेज के साथ खाद बांटी जा रही है।
इसके अलावा, सलारपुर ब्लॉक में उचित दर की दुकानों पर राशन आपूर्ति करने वाले ट्रांसपोर्टर (सुमित ठेकेदार) द्वारा घटिया गुणवत्ता और पानी में भीगा हुआ गेहूं पहुंचाया जा रहा है। सरकारी खरीद में 50 किलो की मानक बोरी (49.5 किलो अनाज + 500 ग्राम बोरी) के नियम के विपरीत ट्रांसपोर्टर डीलरों को 52 किलो तक तौलकर राशन दे रहे हैं, जिससे भारी हेराफेरी हो रही है। इस संबंध में पूर्व में जिला पूर्ति अधिकारी से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यूनियन के नेताओं ने तहसील सदर में दाखिल-खारिज (नामांतरण) के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया। आरोप लगाया कि लेखपाल और पेशगार बिना किसी वैध आधार के फाइलें पेंडिंग रखते हैं। रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन नामांतरण के नाम पर पैसों की मांग की जाती है, और पैसा न मिलने पर अनावश्यक आपत्तियां लगाकर मामले लटकाए जाते हैं।
इसके अलावा पैमाइश के नाम पर रिश्वतखोरी, गलत सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र में सही आख्या न लिखने जैसी समस्याओं का जिक्र करते हुए किसानों ने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में हरीश पटेल, प्रताप सिंह, भावेश सिंह, खान बहादुर, राजपाल, विपिन माहेश्वरी, कमल गुप्ता, रामेंद्र यादव, पप्पू मौर्य, रामपाल मौर्य, बलवीर सिंह, शिवपाल सिंह, गंगा सिंह, साहव, द्वारकेश सिंह पटेल, परमेश्वरी, प्रदीप, सुभाष माहेश्वरी, वसीम, गजेंद्र यादव, ऋषिपाल सिंह, अशोक पटेल, सर्वेंद्र यादव, प्रेमपाल प्रधान, अवनीश शर्मा, महेश चंद्र, रजत प्रजापति, राजीव पटेल, परमानंद, हरबंस पटेल और विकास पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान और यूनियन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


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