बलदेव धाम बना आस्था का केंद्र, बाबा की कृपा से पलभर में पूरी हो रही श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं
गुरु जी श्री श्री 1008 ललतेश्वर महाराज के सान्निध्य में लगते हैं भव्य दरबार, सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण बनता है विशेष आकर्षण
बिसौली। आस्था जब सच्चे भाव से जुड़ती है, तो चमत्कार अपने आप होने लगते हैं। कुछ ऐसा ही अनुभव कर रहे हैं बलदेव धाम आने वाले हज़ारों श्रद्धालु, जिनकी मान्यता है कि बाबा की कृपा से जीवन की हर परेशानी पलभर में दूर हो जाती है।
जैसे-जैसे भक्तों की समस्याएं हल होती जा रही हैं, वैसे-वैसे बाबा के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास और भी प्रगाढ़ होता जा रहा है। धाम की ख्याति दूर-दराज़ के गाँवों और शहरों तक फैल चुकी है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां अपनी व्यथा लेकर आते हैं और बाबा की शरण में आते ही उन्हें अद्भुत शांति और समाधान का अनुभव होता है।
हर मंगलवार और शनिवार को बलदेव धाम में भव्य दरबार का आयोजन किया जाता है। गुरुजी श्री श्री 1008 श्री ललतेश्वर महाराज की अगुवाई में विधिवत पूजा-अर्चना होती है, जिसमें भक्त पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लेते हैं। पूजा के बाद सुंदरकांड पाठ होता है, जिसके दौरान भक्ति से सराबोर माहौल और भक्तों के आंखों से छलकते श्रद्धा के आंसू धाम की पवित्रता को और भी गहरा कर देते हैं।
पूजन और पाठ के उपरांत बाबा की हाजिरी लगाई जाती है, जिसमें भक्त अपने मन की बात बाबा से कहते हैं। यहां आने वाले लोगों का कहना है कि कई बार बिना कहे ही बाबा उनके मन की बात जान लेते हैं और उसका समाधान भी कर देते हैं। कई भक्तों ने तो अपने रोग, संतान-सुख, आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलने की साक्षात गवाही दी है।
धाम पर आने वाले हर श्रद्धालु के लिए भंडारे और प्रसाद की व्यवस्था भी बड़े भक्ति भाव से की जाती है। दूर-दराज़ से आने वाले लोग भी यह कहते सुने जाते हैं कि “बाबा के दरबार में भूखा कोई नहीं लौटता।” यहाँ न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, बल्कि आत्मिक संतोष और शांति भी मिलती है।
बलदेव धाम अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के विश्वास, आशा और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक बन गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा की कृपा से हर असंभव कार्य भी संभव हो जाता है — बस शुद्ध हृदय से एक बार बाबा को पुकारने की देर है।
Budaun Amarprabhat