नियमों की धज्जियां उड़ाकर सड़कों पर दौड़ रहे ई रिक्शा, यात्रियों की जान के साथ कर रहे खिलवाड़
परिवहन विभाग एवं ट्रैफिक पुलिस भी शासनादेश के नियमों का नहीं करा पा रहे पालन
बरेली । शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा का संचालन अव्यवस्था और खतरे का दूसरा नाम बन चुका है सरकार द्वारा तय किए गए नियम कायदों को पूरी तरह ताक पर रखकर ई रिक्शा चालक मनमाने तरीके से दौड़ा रहे हैं तेज रफ्तार गलत दिशा में चलना स्टाप से बाहर यात्रियों को बैठाना और क्षमता से दोगुनी सवारी बैठाकर चलाना रोजमर्रा की बात हो गई है।
जहां सरकार ने ई रिक्शा को पर्यावरण हितैषी और सस्ती सवारी का विकल्प माना था वही हकीकत में यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो रहा है पंजीकरण और लाइसेंस से वंचित बड़ी संख्या में ई रिक्शा वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
यातायात अव्यवस्था होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी तेजी से बड़ा है कई बार पुलिस और परिवहन विभाग की टीमों द्वारा अभियान चलाए जाने के बावजूद हालात जस के तस है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और शक्ति के अभाव के कारण ही ई रिक्शा चालक नियम तोड़ने से नहीं डरते लोगों ने मांग की है कि ऐसे चालकों पर तुरंत कार्यवाहियों और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
*ई-रिक्शा के लिए केंद्र राष्ट्रीय स्तर के क्या है आदेश और नियम*
ई-रिक्शा एवं ईकार्ट अधिसूचना 5 जनवरी 2016 मोटर परिवहन मंत्रालय ने एक सूचना जारी किया जिसमें ई रिक्शा और ई कार्ट के लिए निम्न बातें निर्धारित की हैं जैसे वाहन निर्माता या डीलर को अनुमोदित प्रारूप 22 में सड़क योग्यता प्रमाण पत्र जारी करना होगा।
पंजीकरण हेतु आवेदन के साथ-साथ वाहन निर्माता या डीलर को अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना होंगे।
ई-रिक्शा और आई कार्ड को 25 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति सीमा के अंतर्गत लाना है लेकिन अगर सड़कों पर ई-रिक्शा को देखा जाए तो 40-45 किमी प्रति घंटा की स्पीड पर ई रिक्शा सड़कों पर दौड़ते हैं।
ई-रिक्श वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र देना अनिवार्य कर देना चाहिए क्योंकि सड़कों पर दौड़ रहे ई रिक्शा वाहनों में ना तो हॉर्न बजता है ना इंडिकेटर चलते हैं ना हेडलैंप चलते हैं जिसकी वजह से दुर्घटनाएं शत प्रतिशत बढ़ती नजर आ रही है
Budaun Amarprabhat