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यज्ञ की ज्वाला और वेदमंत्रों की ध्वनि जीवित हैं, तब तक रहेगा धर्म और संस्कृति : संजीव

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यज्ञ की ज्वाला और वेदमंत्रों की ध्वनि जीवित हैं, तब तक रहेगा धर्म और संस्कृति : संजीव

बदायूं : बिनावर क्षेत्र के ग्राम नवलपुर के शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित गायत्री महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिकता और वैदिक संस्कृति की आभा से आलोकित कर दिया। इस महायज्ञ में दूर-दराज़ के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए और गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियां समर्पित कर राष्ट्र की उन्नति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और लोककल्याण की कामना की।
संचालक यज्ञवीर उपाधि से विभूषित गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, कुरीतियों के दहन और समाज में सत्कर्म की स्थापना का साधन है। यज्ञ की ज्वाला और वेदमंत्रों की ध्वनि जीवित हैं, तब तक धर्म और संस्कृति अक्षुण्ण रहेंगे।
शिक्षक प्रेमपाल शाक्य ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह मानव और प्रकृति के बीच गहन सामंजस्य का प्रतीक है। वेद मंत्र हमें बताते हैं कि आहुति केवल अनाज या घृत की नहीं, बल्कि अपने अहंकार, लोभ और अवगुणों की होनी चाहिए।
महायज्ञ के मुख्य यजमान डा. राजेश कुमार शाक्य एवं डा. पूनम रानी रहीं। उन्होंने यज्ञ की आहुतियां के साथ यह संकल्प लिया कि वे समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करते रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान शिव मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वातावरण ॐ भूर्भुवः स्वः और “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे” जैसे मंत्रों की अनुगूंज से गुंजायमान रहा। महिलाओं और देवकून्याओं ने मंगलगीत गा रही थीं और ग्रामीण समाज भावविभोर होकर सामूहिक रूप से आहुतियां अर्पित की। पूरा आयोजन मानो आध्यात्मिकता पर्व में परिवर्तित हो गया। इस अवसर पर धनपाल शाक्य, सूरज पाल, सचिन मौर्य, गिरीश मौर्य, अनिल मौर्य आदि ने महायज्ञ को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अद्वितीय पर्व बताया।


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