महारास और शरद पूर्णिमा का लक्ष्मी संबंध: आचार्य राजेश कुमार शर्मा
आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाया जाता है। इस साल यह 06 अक्टूबर को है। आईए जानते हैं आचार्य राजेश कुमार शर्मा से शत पूर्णिमा के विषय में आचार्य के अनुसार इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। और उसकी किरणों में अमृत का संचार होता है। ऐसी मान्यता है कि इस रात को चंद्रमा की किरणों में स्वास्थ्यवर्धक और औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। इसलिए लोग शरद पूर्णिमा की रात छत या आंगन में खीर रखते हैं, ताकि चंद्रमा की किरणों के औषधीय और दिव्य गुण उसमें आ जाएं। फिर अगले दिन सुबह इसका सेवन करते हैं।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार भगवान श्रीकष्ण का महारास भी शरद पूर्णिमा की तिथि का ही बताया जाता है।
जब श्रीकृष्ण ने रचाया महारास
शरद पूर्णिमा की तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सबसे पूर्ण और उज्ज्वल अवस्था में होता है। और इसकी चांदनी विशेष रूप से पवित्र और अमृतमय हो जाती है। श्रीकृष्ण ने इसी दिन वृंदावन के गोपियों के साथ महारास का आयोजन किया था।
श्रीकृष्ण और गोपियों का यह दिव्य रास एक प्रेम मयी, आध्यात्मिक और अलौकिक घटना थी, जिसे भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस रासलीला में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया शक्ति से गोपियों के साथ नृत्य किया, जिससे गोपियों को यह अनुभव हुआ कि श्रीकृष्ण केवल उन्हीं के साथ नृत्य कर रहे हैं।
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह रात खासकर मां लक्ष्मी को समर्पित होती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय इसी दिन माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे उनके जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस रात को चंद्रमा की पूर्ण रोशनी में सभी जगह शुभ ऊर्जा का प्रवाह माना जाता है। लोग घर की सफाई कर, दीपक जलाकर और फूलों से घर की सजावट कर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
मंत्रो के जाप से आती है सुख समृद्धि
शरद पूर्णिमा की रात को विशेष रूप से मंत्रों का जप करने की परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी के मंत्रों का उच्चारण करने से घर में सुख, धन, सौभाग्य और समृद्धि आती है। इसे करते समय मन को शुद्ध और भावनाओं को सच्चा रखना जरूरी माना जाता है। माना जाता है कि इस रात को जागरण करने से जीवन में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है और नेगेटिव एनर्जी दूर होती है।
शरद पूर्णिमा के प्रमुख लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
इस मंत्र का जाप शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को देखते हुए करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में समृद्धि आती है।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये
इस मंत्र के जाप से मां लक्ष्मी के साथ कुबेर देवता भी प्रसन्न होते हैं. इसका प्रभाव घर में धन और सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला होता है।
ॐ श्रीं लक्ष्मी महामहालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
यह लक्ष्मी महामंत्र माना जाता है. इसे जपने से परिवार में खुशहाली, उन्नति और धन लाभ होता है।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
Budaun Amarprabhat