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अच्छे संस्कार अच्छे कर्म ही हमारे सुख का आधार है : आचार्य संजीव रूप

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साप्ताहिक सत्संग

*अच्छे संस्कार अच्छे कर्म ही हमारे सुख का आधार है : आचार्य संजीव रूप*

बिल्सी, तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंत्र में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया । आज का सत्संग अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप के निर्देशन में हुआ ! सर्वप्रथम अथर्ववेद के मंत्रों से यज्ञ हुआ ! उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से आहुतियां देकर सबके स्वस्थ सुखी मंगलमय जीवन की कामना की ! आचार्य संजीव रूप ने कहा “ईश्वर तो सदा सर्वदा हमारी आत्मा में बसा हुआ हमें प्राप्त है , किंतु अज्ञान के कारण हमें उसकी प्रतीति नहीं होती ! जैसे कस्तूरी हिरण की नाभि से सुगंध आती है किंतु वह सोचता है कि सुगंध दूर कहीं से आ रही है और वह उसी के पीछे भागता है वैसे ही लोग भगवान को ढूंढने दुनिया में जाते हैं किंतु भगवान तो सदा साथ रहते हैं । कोई पूँछे कि ईश्वर किस प्रकार सदा हमारे साथ है तो इसका प्रमाण है जब भी हम कोई काम करने जाते हैं यदि वह गलत है तो हमारे अन्दर भय शंका लज्जा जैसे भाव उत्पन्न होते है और अच्छे काम करें तो निर्भयता उत्साह और आनंद की अनुभूति होती है ! यह अंदर बैठे ईश्वर की ही ओर से होता है । आचार्य ने कहा कि हमारी अच्छी आदत , हमारे अच्छे कर्म हमारे अच्छे संस्कार ही हमें सुखी करते हैं ! यही सच्ची भक्ति भी है ईश्वर की ‘ ! डाँ सत्यम आर्य ने यज्ञ किया तथा यज्ञ को सर्वोत्तम चिकित्सा पद्धति बताया ! इस अवसर पर राकेश आर्य , विचित्रपाल सिंह, सचिन आर्य, श्रीमती गुड्डू देवी श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती सुरजा देवी, कुमारी कौशिकी रानी आदि मौजूद रहे !


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