बदायूँ – संवाददाता गोविंद देवल
उत्तर प्रदेश में निरंतर हो रहे विकास कार्य और कुशल नेतृत्व ने प्रदेश को डेवलपमेंट और डिफेन्स का नया प्रतीक बना दिया है। प्रदेश की कानून व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार ने देश में इसकी सुदृढ़ छवि स्थापित की है। आज उत्तर प्रदेश किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब केवल तहजीब का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक, उद्योग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड में ब्राह्मोस मिसाइल का प्रथम बैच फ्लैग ऑफ किया गया। यह स्वदेशी तकनीक पर आधारित सुपरसोनिक मिसाइल प्रदेश और देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
ब्राह्मोस मिसाइल की लखनऊ यूनिट में इंजीनियरिंग, आईटीआई और पॉलिटेक्निक डिग्री/डिप्लोमा धारक युवा रोजगार प्राप्त कर अपने भविष्य को उज्ज्वल बना रहे हैं। प्रदेश के छह डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर नोड्स—लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट—में अब तक 15,000 से अधिक युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला भी है।
राज्य सरकार द्वारा डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक 2,500 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। लखनऊ में ब्राह्मोस मिसाइल के निर्माण के साथ-साथ अमेठी में ए.के. 203 और प्रदेश में वेब्ले स्कॉट रिवॉल्वर का निर्माण भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रतिवर्ष 100 ब्राह्मोस मिसाइलों का निर्माण होता है और भविष्य में क्षमता बढ़ाकर 150 मिसाइल प्रति वर्ष की जाए, तो प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष 150-200 करोड़ रुपये GST के रूप में प्राप्त होंगे। वर्तमान में झांसी में 56,000 एकड़ भूमि नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विकसित की जा रही है, जबकि झांसी और चित्रकूट में एक्सप्रेस-वे पर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के नोड्स स्थित हैं।
इसके साथ ही IIT कानपुर और IIT BHU में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर भी कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर प्रमुख स्थान बनाएगा और यह प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय बनेगा।
Budaun Amarprabhat