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नाम जप से नहीं, सदाचार से होता है उद्धार: आचार्य संजीव रूप

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बिल्सी |
तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी ग्राम स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ संपन्न कराते हुए प्रवचन दिए।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि केवल भगवान राम का नाम लेने से व्यक्ति सदाचारी नहीं बन जाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि नाम जप मात्र से ही उद्धार हो जाता, तो रामपाल, राम रहीम और आसाराम जैसे लोग जेल की हवा नहीं खाते। भगवान राम का नाम लेकर यदि कर्म रावण जैसे किए जाएं, तो उद्धार संभव नहीं है। ऐसे लोग समाज में निंदा के पात्र बनते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान राम की सच्ची पूजा यही है कि हम सदाचारी बनें, माता-पिता की सेवा करें, बुजुर्गों और गुरुओं का सम्मान करें, अपनी पत्नी के प्रति वफादार रहें और चरित्रवान जीवन जिएं।
आचार्य संजीव रूप ने आगे कहा कि मनुष्य के अनेक शत्रु होते हैं जो उसे सुखी नहीं होने देते। इनमें पहला शत्रु आलस्य, दूसरा अहंकार, तीसरा दिखावे की जिंदगी और चौथा आय से अधिक खर्च करना है। यदि इन पर विजय पा ली जाए, तो जीवन स्वतः ही सुखमय हो सकता है।
सत्संग के दौरान प्रश्रय आर्य ने भजन “शरण प्रभु की आओ रे, यही समय है प्यारे” प्रस्तुत किया। आज के यजमान राकेश आर्य एवं उनकी धर्मपत्नी रहीं।
कार्यक्रम में विचित्रपाल सिंह, पंजाब सिंह, श्रीमती कमलेश रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती रेखा रानी, श्रीमती सरोजा देवी सहित आर्य संस्कारशाला के बच्चे भी उपस्थित रहे। सत्संग में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।


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