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धर्म और नीति एक-दूसरे के पूरक: आचार्य कृष्ण कार्तिकेय

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— संवाददाता: आई एम खान , बिसौली
बिसौली। क्षेत्र के गांव मुसियानगला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य कृष्ण कार्तिकेय “बृजानुरागी” ने धर्म और नीति की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को जीवनोपयोगी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म हमें सत्य बोलना सिखाता है, लेकिन कब और कहां सत्य बोलना चाहिए, यह नीति बताती है।
आचार्य ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक कसाई गाय के पीछे दौड़ रहा था। रास्ते में बैठे एक महात्मा से उसने गाय के बारे में पूछा। महात्मा दुविधा में पड़ गए—सत्य बोलने पर गाय की हत्या निश्चित थी और असत्य बोलने पर पाप का भय। अंततः उन्होंने नीति का सहारा लेते हुए कसाई को गलत दिशा बता दी, जिससे गाय के प्राण बच गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी के प्राण बचाने के लिए असत्य बोला जाए तो वह पाप नहीं माना जाता।
उन्होंने आगे कहा कि धर्म और नीति एक-दूसरे के पूरक हैं। नीति जीवन जीने की शैली सिखाती है और व्यक्ति को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। धर्म के बिना नीति अधूरी है और नीति के बिना धर्म अधूरा है।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान पति धर्मेंद्र मिश्रा ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की बधाई देते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को उपहार वितरित किए और व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। कथा में गांव के वरिष्ठजन, महिलाएं एवं दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम का संचालन मोहित शंखधार ने किया।


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