15 मार्च को जिला मुख्यालय पर कार्यक्रम का न्योता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर जोर
लखनऊ/गाजीपुर। सामाजिक न्याय के पुरोधा और बहुजन आंदोलन के प्रणेता कांशीराम की 92वीं जयंती को लेकर जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ग्रामसभा गोलाधरी में पीडीए जनचौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। चौपाल के माध्यम से 15 मार्च को जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले जयंती समारोह में शामिल होने के लिए लोगों को आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पिछड़ा दलित विकास महासंघ एवं यादव महासभा गाजीपुर के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव मौजूद रहे, जबकि मुख्य वक्ता पूर्व डीआईजी बलिकरन यादव रहे। कार्यक्रम का संयोजन समाजवादी पार्टी के पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव सूरज राम बागी ने किया।
पूर्व डीआईजी बलिकरन यादव ने कहा कि संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए समाज का जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से डॉ. भीमराव अंबेडकर के पदचिह्नों पर चलने और शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जागरूक समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
मुख्य अतिथि सुजीत यादव ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना होगा। युवाओं को नशा, तेरही और दहेज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों से 15 मार्च को प्रातः 10 बजे गाजीपुर पहुंचकर कांशीराम जयंती कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।
कार्यक्रम के संयोजक सूरज राम बागी ने कहा कि पीडीए समाज की आवाज को मजबूत करने के लिए समाजवादी पार्टी निरंतर संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2027 में जनता समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाती है, तो पिछड़े, दलित और वंचित समाज के विकास को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि 15 मार्च को जिला मुख्यालय स्थित सरजू पार्क में कांशीराम जयंती को “बहुजन समाज दिवस” और “पीडीए दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। कार्यक्रम समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल यादव के नेतृत्व में संपन्न होगा, जिसमें जिले के विधायक, सांसद और कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
इस अवसर पर मनई राम बिंद, सपा नेता सदानंद कनोजिया, अजय यादव सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। चौपाल में उपस्थित लोगों ने भारी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।
Budaun Amarprabhat