दूर के बादलों में बिजली चमकने पर दिखाई देती है रोशनी, लेकिन कमजोर पड़ जाती है गरज
बदायूं। रात के समय कई बार आसमान में बिना तेज आवाज के बार-बार बिजली चमकती दिखाई देती है। इसे लेकर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर बिजली चमकने के बावजूद गरज सुनाई क्यों नहीं देती। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, इसके पीछे पूरी तरह वैज्ञानिक कारण हैं।
उन्होंने बताया कि कई बार 20 से 100 किलोमीटर या इससे भी अधिक दूरी पर बने बादलों में बिजली चमक रही होती है। बिजली की रोशनी प्रकाश की तेज गति के कारण तुरंत दिखाई देती है, जबकि गरज की आवाज ध्वनि के रूप में काफी धीमी गति से आगे बढ़ती है। अधिक दूरी तय करने के दौरान ध्वनि कमजोर हो जाती है और कई बार बिल्कुल सुनाई नहीं देती।
अमर पाल सिंह के मुताबिक, बादलों के अंदर होने वाली बिजली को इंट्रा-क्लाउड लाइटनिंग कहा जाता है। इसमें बिजली बादलों के अंदर ही चमकती है और जमीन तक नहीं पहुंचती। दूर होने के कारण इसकी चमक साफ दिखाई दे सकती है, जबकि गरज बहुत हल्की सुनाई देती है।
उन्होंने बताया कि तापमान, नमी, हवा की दिशा और वायुमंडल की अलग-अलग परतें भी ध्वनि की दिशा और तीव्रता को प्रभावित करती हैं। आम बोलचाल में दूर से दिखाई देने वाली ऐसी बिजली को ‘हीट लाइटनिंग’ कहा जाता है, जबकि वैज्ञानिक रूप से यह बिजली का कोई अलग प्रकार नहीं है।
ऐसे बनती है बिजली और गरज
खगोलविद ने बताया कि बादलों में विद्युत आवेश जमा होने के बाद जब धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के बीच अंतर बहुत अधिक हो जाता है तो हवा का इन्सुलेशन टूट जाता है। हवा आयनित होकर विद्युत का संचालन करने लगती है और अचानक तेज विद्युत प्रवाह होता है। इसी प्रक्रिया में तेज रोशनी दिखाई देती है।
बिजली के दौरान आसपास की हवा बहुत तेजी से गर्म होकर फैलती है। इससे आघात तरंग पैदा होती है, जिसे हम गरज के रूप में सुनते हैं। इसलिए दूर के तूफान में बिजली की चमक दिखाई देना जरूरी नहीं कि उसी स्थान पर बारिश भी हो रही हो।
Budaun Amarprabhat